रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सफलता का परचम लहराया है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों को पछाड़ते हुए देश में पहला स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि प्रशासनिक सक्रियता, शिकायतों के तेज निराकरण और लाभार्थियों के समय पर पंजीयन का परिणाम है।
कैसे मिली यह बड़ी उपलब्धि?
छत्तीसगढ़ की इस सफलता के पीछे तीन मुख्य स्तंभ रहे हैं:
- पंजीयन पर फोकस: वर्ष 2024-25 में 2,19,012 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन हुआ, जबकि 2025-26 में फरवरी तक ही लक्ष्य का 93.3% हासिल कर लिया गया।
- त्वरित मंजूरी: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर राज्य स्तर तक की चयन प्रक्रिया में तेजी लाई गई। आवेदनों के 83% परीक्षण के बाद उन्हें भुगतान हेतु केंद्र को भेजा गया, जहाँ छत्तीसगढ़ की स्वीकृति दर सर्वाधिक (83.87%) रही।
- शिकायतों का निराकरण: राज्य ने 93% शिकायतों का सफलतापूर्वक समाधान किया। भुगतान से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता पर हल कर लाभार्थियों को सीधा लाभ पहुँचाया गया।
सुरक्षित मातृत्व सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर कहा कि “प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा दिया जा रहा है।” उन्होंने इस सफलता का श्रेय आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर राज्य स्तर के अधिकारियों के समर्पण को दिया।
क्या है योजना और इसके लाभ?
योजना का मुख्य उद्देश्य संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना और शिशु मृत्यु दर को कम करना है।
- पहली संतान: कुल 5,000 रुपये की सहायता (तीन किस्तों में)।
- दूसरी बेटी का जन्म: सुरक्षित भविष्य के लिए एकमुश्त 6,000 रुपये की राशि।
- अब तक का रिकॉर्ड: पिछले तीन वर्षों में कुल 5,98,947 महिलाओं का पंजीयन किया गया, जिनमें से 5.40 लाख से अधिक को स्वीकृति मिल चुकी है।
डबल इंजन की सरकार ने साबित कर दिया है कि बेहतर मॉनिटरिंग और ‘जीरो पेंडेंसी’ के संकल्प से जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जा सकता है।
