बैंकॉक। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थाईलैंड के बैंकॉक में BIMSTEC देशों की 6वीं समिट में शामिल होने पहुंचे हैं। थाईलैंड की प्रधानमंत्री पेइतोंग्तार्न शिनवात्रा ने पीएम मोदी का स्वागत किया। समिट के बाद पीएम मोदी और बांग्लादेश के चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस के बीच बातचीत हो सकती है। इससे पहले, दोनों नेता कल रात BIMSTEC डिनर में एक साथ दिखाई दिए थे।
यह पहली बार है जब बांग्लादेश में हुए तख्तापलट के बाद दोनों नेताओं की मुलाकात हो रही है। इसके अलावा, पीएम मोदी ने आज म्यांमार के मिलिट्री लीडर जनरल मिन आंग से भी मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी ने म्यांमार में हाल ही में आए भूकंप में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि भारत म्यांमार की मदद के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।
BIMSTEC: क्या है और भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण
BIMSTEC (बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक को-ऑपरेशन) का गठन 1997 में हुआ था। यह संगठन बंगाल की खाड़ी से जुड़े सात देशों का एक क्षेत्रीय समूह है, जिसमें बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, भूटान और नेपाल शामिल हैं।
भारत के लिए यह संगठन महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देता है। विशेष रूप से, भारत की “लुक ईस्ट पॉलिसी” के तहत इस क्षेत्र के देशों के साथ संबंध मजबूत करना अहम है।
भारत और SAARC: BIMSTEC की तरफ क्यों बढ़ा भारत
भारत ने SAARC (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) में पाकिस्तान के साथ तनाव के कारण BIMSTEC की तरफ रुख किया। 2014 में SAARC समिट में पाकिस्तान के साथ हुए विवाद के बाद, भारत ने SAARC में शामिल होने के लिए पाकिस्तान के साथ मुलाकात से इनकार कर दिया। इसके बाद से SAARC समिट का आयोजन नहीं हुआ है। भारत के लिए BIMSTEC का महत्व और बढ़ गया है, खासकर चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को काउंटर करने के लिए। इसके जरिए भारत, बंगाल की खाड़ी और आसपास के देशों से अपनी कनेक्टिविटी को मजबूत करना चाहता है, क्योंकि यह क्षेत्र समुद्री व्यापार और वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है।