दिल्ली। ऑनलाइन फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म से सामान मंगाना आने वाले दिनों में महंगा पड़ सकता है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण देश में पेट्रोल और डीजल करीब 4 रुपए प्रति लीटर तक महंगे हुए हैं। इसका असर स्वीगी, जोमेटो और क्विक कॉमर्स कंपनियों पर पड़ रहा है।
इलायरा कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्यूल की कीमत बढ़ने से कंपनियों की डिलीवरी कॉस्ट बढ़ रही है। ऐसे में कंपनियां यह अतिरिक्त बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं। इसका मतलब है कि हर ऑर्डर पर लगने वाली डिलीवरी फीस, हैंडलिंग चार्ज या प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी हो सकती है।
दरअसल, जोमैटो और स्विगी पहले ही मार्च में अपनी प्लेटफॉर्म फीस बढ़ा चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2023 से 2026 के बीच इन प्लेटफॉर्म्स की फीस करीब 9 गुना तक बढ़ चुकी है। फिलहाल क्विक कॉमर्स ऑर्डर की औसत डिलीवरी लागत 35 से 50 रुपए और फूड डिलीवरी की लागत 55 से 60 रुपए प्रति ऑर्डर तक पहुंच चुकी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, कुल डिलीवरी खर्च का करीब 20% हिस्सा ईंधन पर खर्च होता है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल महंगा होने से कंपनियों का प्रति ऑर्डर खर्च बढ़ रहा है। अगर तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हुई तो यह दबाव और बढ़ सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कंपनियां यह खर्च खुद उठाती हैं तो उनके मुनाफे पर असर पड़ेगा। खासतौर पर स्विगी के मुनाफे में 10 से 12% तक की गिरावट आ सकती है। वहीं डिलीवरी पार्टनर्स भी बढ़ते पेट्रोल खर्च के चलते ज्यादा भुगतान की मांग कर सकते हैं।
कंपनियां बढ़ी लागत का बोझ तीन तरीकों से बांट सकती हैं— ग्राहकों से ज्यादा फीस लेकर, खुद मार्जिन कम करके और डिलीवरी पार्टनर्स के पेआउट स्ट्रक्चर में बदलाव करके।
