दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने भारतीय जनता पार्टी छोड़कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दामन थाम लिया है। उनके इस फैसले को विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
करीब दस साल पहले भाजपा में शामिल हुए चंद्र बोस ने रविवार को टीएमसी के नेताओं कीर्ति आजाद और ब्रात्य बसु की मौजूदगी में पार्टी का झंडा थामा। इससे पहले वे 2016 में भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी के खिलाफ भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
टीएमसी में शामिल होते हुए चंद्र बोस ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा देश के संविधान और नेताजी के सिद्धांतों के खिलाफ काम कर रही है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भाजपा में शामिल होना उनकी गलती थी, जिसे उन्होंने अब सुधार लिया है।
चंद्र बोस ने कहा कि भारत की असली पहचान सर्वधर्म समभाव है, लेकिन वर्तमान राजनीति में धर्म और संप्रदाय के आधार पर विभाजन किया जा रहा है। उनके मुताबिक, भाजपा में रहते हुए नेताजी के विचारों के अनुसार काम करना संभव नहीं था।
उन्होंने यह भी दावा किया कि भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी की जीत तय है। उनके इस बयान और पार्टी बदलने के फैसले से बंगाल की सियासत में नया मोड़ आ गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले यह कदम टीएमसी की रणनीति का हिस्सा है, जिससे विपक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सके।
