बस्तर। छत्तीसगढ़ का बस्तर, जो चार दशक से नक्सल आतंक का केंद्र रहा है, अब निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। हिड़मा और बसवाराजू जैसे टॉप कमांडरों के मारे जाने के बाद संगठन की कमर टूट चुकी है।
पिछले डेढ़ साल में सुरक्षा बलों ने 13 से अधिक बड़े नक्सली लीडरों को एनकाउंटर में ढेर किया है। इसके साथ ही भूपति, रूपेश और अब चैतू जैसे महत्वपूर्ण कमांडरों के सरेंडर ने नक्सल नेटवर्क को और कमजोर कर दिया है।
अब संगठन में केवल देवा, गणपति, मिशिर बेसरा, पापाराव, गणेश उइके और बारसे देवा जैसे कुछ ही वरिष्ठ नेता बचे हैं। इनके खत्म होते ही बस्तर में नक्सलवाद का लगभग पूर्ण अंत तय माना जा रहा है।
बस्तर IG सुंदरराज पी के अनुसार, पहले जहां 7 डिवीजन और 15 एरिया कमेटियां सक्रिय थीं, अब अधिकांश डिवीजन खत्म हो चुके हैं। दंडकारण्य इलाके में केवल 120–150 सशस्त्र नक्सली ही बचे हैं। नेतृत्व की कमी के चलते निचले स्तर के कैडर भी धीरे-धीरे हथियार छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।
18 नवंबर को देश का सबसे खतरनाक नक्सली हिड़मा मारेडमिल्ली जंगल में हुए एनकाउंटर में ढेर किया गया। इसके बाद लगातार बड़ी कार्रवाई हुई।
इसी साल अबूझमाड़ में पोलित ब्यूरो मेंबर बसवाराजू सहित 27 नक्सली मारे गए, कर्रेगुट्टा में 31 और पिछले साल थुलथुली में 38 नक्सली ढेर हुए। कई मुठभेड़ों में 10, 15, 20 से लेकर 25 नक्सली एक साथ मारे गए। इसके अलावा 2 करोड़ के इनामी बालाकृष्ण समेत कई महत्वपूर्ण कमांडर भी मारे जा चुके हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया है कि 31 मार्च 2026 तक देश नक्सलवाद मुक्त होगा। मिशन 2026 के तहत फोर्स तेजी से काम कर रही है। बस्तर, जो कभी नक्सलियों का सबसे मजबूत गढ़ था, आज फोर्स की पकड़ में है और नक्सलवाद अपने अंतिम चरण में दिख रहा है।
