मनरेगा और योजनाओं के अभिसरण से जल संरक्षण व आजीविका को मिली मजबूती
रायपुर। राज्य सरकार के “मोर गांव–मोर पानी” महाअभियान के तहत मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिला जल संरक्षण और ग्रामीण विकास का मॉडल बनकर उभरा है। मनरेगा और विभिन्न योजनाओं के प्रभावी अभिसरण से जिले में जल संवर्धन, भू-जल स्तर सुधार और ग्रामीण आजीविका को नई दिशा मिली है।
अभियान के तहत जिले में 1700 से अधिक आजीविका डबरी का निर्माण किया गया है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में औसतन 9 डबरी विकसित कर जल संरक्षण को आजीविका से जोड़ा गया है। “जल संरक्षण हमारी जिम्मेदारी” थीम पर चल रहे इस अभियान को जनसहभागिता के कारण जनआंदोलन का रूप मिल चुका है।
वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों के यहां 2541 सोखता गड्ढे बनाए गए हैं। इसके साथ ही श्रमदान के जरिए 175 बोरी बंधान, 3600 कंटूर ट्रेंच और 87 तालाबों का नवीनीकरण किया गया है। जागरूकता के लिए रैली, कलश यात्रा, शपथ और दीपदान जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
जलदूत ऐप के आंकड़ों के अनुसार जिले में भू-जल स्तर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ है। प्री-मानसून 2024 की तुलना में प्री-मानसून 2025 में 1.81 मीटर और पोस्ट-मानसून में 2.19 मीटर तक जल स्तर बढ़ा है। यह अभियान की सफलता को दर्शाता है।
इन प्रयासों का असर यह हुआ कि जिले के तीनों विकासखंड, जो पहले सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में थे, अब “सेफ ब्लॉक” की श्रेणी में आ गए हैं। यह उपलब्धि सामूहिक प्रयास, प्रभावी जल प्रबंधन और ग्रामीण भागीदारी का परिणाम है।
यह अभियान न केवल जल संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।
