नक्सल मुक्त क्षेत्रों के लिए ‘मिशन 30 हजार’: परिवारों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य; मुख्य सचिव ने बनाई मेगा प्लानिंग

रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित (LWE) इलाकों में बंदूक की गूंज शांत होने के बाद अब खुशहाली की नई इबारत लिखी जा रही है। शुक्रवार को मंत्रालय में मुख्य सचिव श्री विकास शील की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल ‘परामर्श कार्यशाला’ संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा उन 08 जिलों के परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारना है, जो लंबे समय तक संघर्ष से जूझते रहे।
आय 15 हजार से बढ़ाकर 30 हजार करने का लक्ष्य
कार्यशाला में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। सर्वे (NCAER) के मुताबिक, इन क्षेत्रों के 85% परिवारों की मासिक आय फिलहाल 15 हजार रुपये से भी कम है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप, राज्य सरकार ने अगले 3 साल में इसे बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
चार स्तंभों पर टिकी ‘नई संजीवनी’ रणनीति
प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारीक ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए 4 प्रमुख स्तंभों का रोडमैप पेश किया। एक परिवार को केवल एक काम पर निर्भर न रखकर कम से कम 3 आजीविका गतिविधियों (खेती, पशुपालन, वनोपज आदि) से जोड़ा जाएगा।
क्लस्टर आधारित खेती और एफपीओ (FPO) को बढ़ावा। आधुनिक खेती और प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना। संतृप्ति: योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना।
60 दिनों में तैयार होगा ब्लॉकवार एक्शन प्लान
मुख्य सचिव विकास शील ने स्पष्ट किया कि जैसे-जैसे क्षेत्र नक्सलवाद से मुक्त हो रहे हैं, वहां शासन की पहुंच बढ़नी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि अगले 60 दिनों के भीतर प्रत्येक विकासखंड में ‘आजीविका क्लस्टर’ की पहचान कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाए।
उत्पादन से लेकर बाजार (मार्केटिंग) तक की पूरी चेन को मजबूत किया जाए ताकि ग्रामीणों को उनके उत्पाद का सही दाम मिल सके। ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन और नाबार्ड जैसे संगठनों के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर ट्रेनिंग दी जाए।



