बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में 9 से 13 जनवरी 2026 तक प्रस्तावित राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी को लेकर बड़ा सियासी और प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है।
भारत स्काउट-गाइड की राज्य परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल और स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव आमने-सामने आ गए हैं। दोनों ही खुद को अध्यक्ष बता रहे हैं। विवाद बढ़ने के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम से जुड़ा सोशल मीडिया पोस्ट भी डिलीट कर दिया है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने खुद को स्काउट-गाइड का वैधानिक अध्यक्ष बताते हुए जंबूरी को स्थगित करने की घोषणा की है। उनका कहना है कि आयोजन नवा रायपुर में होना तय था, लेकिन बिना जानकारी और अनुमति के इसे बालोद में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम की तैयारियों में करीब 10 करोड़ रुपए की गड़बड़ी हुई है।
बृजमोहन अग्रवाल ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की है। याचिका में उन्होंने कहा है कि उन्हें अध्यक्ष पद से हटाने से पहले न तो कोई सूचना दी गई और न ही सुनवाई का मौका मिला।
यह पूरी प्रक्रिया असंवैधानिक है। उन्होंने छत्तीसगढ़ भारत स्काउट एवं गाइड्स के उपनियम 17(1) का हवाला देते हुए कहा कि एक बार मनोनीत अध्यक्ष को 5 वर्ष के लिए पदेन अध्यक्ष माना जाता है और बिना इस्तीफे के उन्हें हटाया नहीं जा सकता।
वहीं स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि यह राष्ट्रीय स्तर का आयोजन है और ऐसे कार्यक्रमों का निर्णय राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा लिया जाता है। उन्होंने कहा कि बृजमोहन अग्रवाल के आरोपों की जानकारी उन्हें नहीं है और वे इस विषय पर उनसे व्यक्तिगत बातचीत करेंगे।
इधर बालोद में जंबूरी को लेकर तैयारियां तेज हैं। हजारों रोवर-रेंजर पहले ही पहुंच चुके हैं और अभ्यास भी शुरू हो चुका है। प्रशासन और आयोजन समिति कार्यक्रम को तय कार्यक्रम के अनुसार कराने की तैयारी में जुटी है।
स्काउट-गाइड के अध्यक्ष पद को लेकर उपजा यह विवाद अब न्यायालय तक पहुंच चुका है। हाईकोर्ट के फैसले पर ही अब यह तय होगा कि जंबूरी का आयोजन होगा या नहीं और अध्यक्ष पद को लेकर स्थिति क्या रहेगी।
