कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल: छत्तीसगढ़ के प्रभारी बदले, सचिन पायलट की जगह सुखदेव भगत को जिम्मेदारी; भूपेश बघेल अब असम के प्रभारी

रायपुर। कांग्रेस ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए कई राज्यों के प्रभारी बदल दिए हैं। छत्तीसगढ़ में अब सचिन पायलट की जगह सुखदेव भगत को प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को असम का प्रभारी बनाया गया है। पार्टी के इस फैसले को आगामी चुनावों से पहले संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।

सचिन पायलट लंबे समय से छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रभारी महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। 2026 में उन्होंने प्रदेश में संगठनात्मक गतिविधियों, जिला स्तर के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कीं। जून में रायपुर में आयोजित कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर में भी उनकी अहम भूमिका रही थी।

अब सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी मिली है। भगत झारखंड से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोहरदगा से लोकसभा सांसद हैं। पार्टी संगठन में उनका लंबा अनुभव रहा है। ऐसे में उनके सामने प्रदेश कांग्रेस में नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय बनाने के साथ जमीनी संगठन को मजबूत करने की चुनौती होगी।

भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को असम का प्रभारी बनाया गया है। इससे पहले 2026 में कांग्रेस ने उन्हें असम विधानसभा चुनाव के लिए AICC सीनियर ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी भी दी थी। इस टीम में डीके शिवकुमार और बंधु तिर्की भी शामिल थे।

बघेल की पंजाब की जिम्मेदारी भी चर्चा में रही। उनके कार्यकाल में पंजाब कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव और प्रदेश नेतृत्व को लेकर कई फैसले हुए। जुलाई में हाईकमान ने बघेल के फॉर्मूले के तहत पंजाब में तीन कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्षों की व्यवस्था को मंजूरी दी थी।

कई राज्यों में बदले प्रभारी

कांग्रेस के ताजा फेरबदल में सचिन पायलट को पंजाब, रणदीप सुरजेवाला को गुजरात, भूपेश बघेल को असम, सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़, श्रीवेल्ला प्रसाद को महाराष्ट्र और पीवी मोहन को आंध्र प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। सुरजेवाला को कर्नाटक की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई है।

छत्तीसगढ़ में प्रभारी बदलने के बाद अब पार्टी का फोकस संगठन को बूथ और ब्लॉक स्तर तक मजबूत करने, नेताओं के बीच समन्वय बढ़ाने और आगामी चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर रहने की संभावना है।

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