रायपुर। किसानों को उचित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने और खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए राज्य के मुंगेली, सारंगढ़ और जशपुर जिलों में प्रशासन ने सख्त अभियान चलाया है।
कलेक्टर के निर्देश पर कृषि विभाग की टीमों द्वारा निजी और सहकारी उर्वरक विक्रय केंद्रों का लगातार औचक निरीक्षण किया जा रहा है। अब तक कुल 90 से अधिक खाद विक्रय केंद्रों की जांच की जा चुकी है।
निरीक्षण के दौरान कई अनियमितताएं सामने आने पर 29 केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जबकि गंभीर लापरवाही और नियम उल्लंघन पाए जाने पर 6 विक्रय केंद्रों पर तत्काल प्रभाव से बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई किसानों के हितों की सुरक्षा और बाजार में खाद की उपलब्धता को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से की जा रही है।
जांच के दौरान खाद के भंडारण, वितरण प्रक्रिया, रेट सूची, पॉश मशीन के उपयोग और किसानों को तय मात्रा में उर्वरक देने की व्यवस्था की बारीकी से समीक्षा की गई।
अधिकारियों ने सभी विक्रय केंद्रों को निर्देश दिए हैं कि वे शासन द्वारा निर्धारित दरों पर ही खाद का वितरण करें और किसी भी प्रकार की जमाखोरी या कालाबाजारी से बचें।
इसी बीच बिलाईगढ़ क्षेत्र में एक कृषि केंद्र पर बड़ी कार्रवाई करते हुए शासकीय दर 266.50 रुपये वाली यूरिया को 800 रुपये में बेचे जाने का मामला सामने आया, जिसके बाद संबंधित केंद्र को सील कर दिया गया।
वहीं जशपुर जिले के फरसाबहार क्षेत्र में कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर 17.1 टन अवैध उर्वरक जब्त किया है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इस उर्वरक को किसानों को डीएपी खाद बताकर बेचने की तैयारी थी, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो सकता था।
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत केंद्रों से ही खाद खरीदें और किसी भी अनियमितता की सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दें।
