मार्च में LPG संकट: खपत में 17% की गिरावट, रेस्तरां में खाना हुआ महंगा

दिल्ली। मार्च 2026 के पहले सप्ताह में भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़े उलटफेर देखने को मिले हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, LPG की खपत में 17% की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि इसके उलट पेट्रोल की बिक्री में 13.2% और डीजल में 8.2% का उछाल आया है।

LPG की कमी का मुख्य कारण पश्चिम एशिया (ईरान) में छिड़ा भीषण युद्ध है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले (ऑपरेशन एपिक फ्यूरी) के बाद ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ में तनाव बढ़ गया है। भारत अपनी जरूरत का 60% से अधिक LPG आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है। वर्तमान में भारतीय झंडे वाले 22 जहाज और 611 नाविक अब भी खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं।

आम आदमी पर असर: 57% रेस्तरां ने बढ़ाए दाम

कमर्शियल गैस सिलेंडरों की किल्लत और ऊंचे दामों का सीधा असर जनता की जेब पर पड़ा है। लागत बढ़ने के कारण 57% रेस्तरां और 54% स्ट्रीट वेंडर्स ने अपने उत्पादों के दाम 10-25% तक बढ़ा दिए हैं। कई शहरों में होटलों ने बिल में ‘LPG रिवीजन शुल्क’ जोड़ना शुरू कर दिया है, जबकि छोटे दुकानदारों ने मजबूरन काम बंद कर दिया है या कोयले के चूल्हों का रुख किया है।

राहत की खबर और सरकारी कदम

संकट के बीच राहत की बात यह है कि भारतीय जहाज ‘नंदा देवी’ (46,500 मीट्रिक टन) और ‘शिवालिक’ (46,000 मीट्रिक टन) LPG लेकर गुजरात के बंदरगाहों पर पहुंच चुके हैं।

सरकार ने कालाबाजारी रोकने के लिए 12,000 से अधिक छापे मारे हैं। शहरी कमर्शियल उपभोक्ताओं को PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
मंत्रालय ने साफ किया है कि सभी ग्राहकों के लिए e-KYC अनिवार्य नहीं है और गैस कनेक्शन नहीं काटे जाएंगे।

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