खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स: कोमालिका बारी की नजरें अब एशियाई खेलों और ओलंपिक पर

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी में आयोजित ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026’ में विश्व विजेता तीरंदाज कोमालिका बारी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
दीपिका कुमारी के बाद विश्व कैडेट और विश्व जूनियर खिताब जीतने वाली भारत की दूसरी महिला रिकर्व तीरंदाज कोमालिका, अब इस मंच के जरिए अपनी लय वापस पाकर 2026 एशियाई खेलों और 2028 ओलंपिक के लिए भारतीय टीम में जगह पक्की करने की कोशिश में हैं।
बांस के धनुष से विश्व खिताब तक का सफर
जमशेदपुर के बिरसानगर की रहने वाली कोमालिका की कहानी संघर्ष और जुनून की मिसाल है। एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मां की प्रेरणा से 12 साल की उम्र में तीरंदाजी शुरू करने वाली कोमालिका के पास शुरुआती दिनों में प्रोफेशनल धनुष खरीदने के पैसे नहीं थे। उन्होंने बांस के अस्थायी धनुष से अभ्यास किया और टाटा आर्चरी अकादमी तक पहुँचने के लिए रोजाना 18 किलोमीटर साइकिल चलाई। आज वह पुणे के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में टॉप-16 खिलाड़ियों का हिस्सा हैं।
ट्राइबल गेम्स: प्रतिभाओं के लिए नया आसमान
कोमालिका का मानना है कि ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ जनजातीय क्षेत्रों की छिपी हुई प्रतिभाओं को बाहर लाने का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने कहा, “अक्सर राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं एक ही खेल पर केंद्रित होती हैं, लेकिन यहाँ राष्ट्रीय खेलों की तरह कई विधाएं एक साथ हैं। यह जनजातीय खिलाड़ियों के लिए एक पूरा इकोसिस्टम बदलने जैसा है।”
मानसिक मजबूती पर फोकस
24 वर्षीय कोमालिका रायपुर में व्यक्तिगत, टीम और मिश्रित स्पर्धाओं में हिस्सा ले रही हैं। उन्होंने बताया कि सीनियर सर्किट की चुनौतियों से निपटने के लिए वह अपनी तकनीक के साथ-साथ मानसिक मजबूती पर विशेष ध्यान दे रही हैं। उनका उद्देश्य केवल पदक जीतना नहीं, बल्कि उन जनजातीय बच्चों को प्रेरित करना है जो संसाधनों के अभाव में अपने सपनों को पीछे छोड़ देते हैं।



