रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 के शिल्पग्राम में प्रदेश की पारंपरिक हस्तशिल्प कलाएं लोगों को आकर्षित कर रही हैं। यहां झारा आर्ट से तैयार मूर्तियां, सजावटी सामान और लोक आकृतियां देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
इनमें सारंगढ़ के युवा शिल्पकार प्रदीप झरेका की बनाई छिंद पेड़ की कलाकृति खास आकर्षण बनी हुई है। इसमें उन्होंने जनजातीय जीवन और संस्कृति में छिंद पेड़ के महत्व को बारीकी से दर्शाया है।
राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ पर नवा रायपुर में आयोजित तीन दिवसीय राज्योत्सव में शिल्पग्राम जोन बनाया गया है। यहां प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के शिल्पकार अपनी कलाओं और हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं।
छिंद पेड़ से रस निकालने की प्रक्रिया दिखाई
सारंगढ़ जिले के ग्राम कांदुरपाली से पहुंचे प्रदीप झरेका सारबिला झारा आर्ट की कलाकृतियां लेकर आए हैं। उनकी छिंद पेड़ की कलाकृति में पेड़ से रस एकत्रित करने की पारंपरिक प्रक्रिया को दिखाया गया है। इसके जरिए उन्होंने जनजातीय समाज की जीवनशैली और प्रकृति से उसके जुड़ाव को सामने रखा है।
प्रदीप के मुताबिक, राज्योत्सव जैसे आयोजनों से स्थानीय शिल्पकारों को अपनी कला दिखाने और नए खरीदारों तक पहुंचने का मौका मिलता है। लोग कलाकृतियां खरीदने के साथ उनके निर्माण की तकनीक और सांस्कृतिक महत्व के बारे में भी जानकारी ले रहे हैं। देवी-देवताओं की प्रतिमाओं और पारंपरिक लोक आकृतियों की भी मांग है।
बस्तर की कलाकृतियों में भी दिख रही संस्कृति
शिल्पग्राम में बस्तर की युवा महिला शिल्पकार भी अपनी कलाकृतियां प्रदर्शित कर रही हैं। उनके उत्पादों में जनजातीय जीवन, प्रकृति और वन्यजीवों की झलक दिखाई देती है। झारा आर्ट में इस्तेमाल होने वाली लॉस्ट वैक्स तकनीक से तैयार कलाकृतियां प्रदेश की समृद्ध शिल्प परंपरा को सामने ला रही हैं। शिल्पग्राम के जरिए स्थानीय कलाकारों को अपनी कला और हुनर के लिए नया बाजार भी मिल रहा है।
