बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के पहले चर्चित राजनीतिक ‘रामअवतार जग्गी हत्याकांड’ में एक बड़ा मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद अब छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में इस मामले की फाइल दोबारा खुल गई है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई शुरू करते हुए मुख्य आरोपी अमित जोगी और याचिकाकर्ता सतीश जग्गी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों भेजा वापस?
दरअसल, निचली अदालत द्वारा अमित जोगी को बरी किए जाने के खिलाफ सीबीआई और सतीश जग्गी ने हाई कोर्ट में अपील की थी, जिसे तकनीकी आधारों और देरी की वजह से 2011 में खारिज कर दिया गया था।
इसके खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। 6 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने देरी को क्षमा करते हुए हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वह गुण-दोष (Merit) के आधार पर इस पर पुनर्विचार करे।
क्या था मामला?
- तारीख: 4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
- पृष्ठभूमि: जग्गी पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी और एनसीपी के कोषाध्यक्ष थे।
- आरोपी: पुलिस ने 31 लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें से 28 को दोषी करार दिया गया, लेकिन अमित जोगी बरी हो गए थे।
कोर्ट की सख्ती और रायपुर एसपी को जिम्मेदारी
हाई कोर्ट ने नोटिस तामील कराने की जिम्मेदारी रायपुर एसपी को सौंपी है। सीबीआई के वकील वैभव ए. गोवर्धन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति कोर्ट के समक्ष पेश की है।
सतीश जग्गी के वकील बीपी शर्मा ने दलील दी कि अब सीबीआई की चार्जशीट और साक्ष्यों के आधार पर मामले की नए सिरे से समीक्षा की आवश्यकता है।
इस सुनवाई के शुरू होने से छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है, क्योंकि यह मामला राज्य के सबसे हाई-प्रोफाइल आपराधिक प्रकरणों में से एक रहा है।
