जग्गी हत्याकांड: 20 साल बाद अमित जोगी को उम्रकैद, हाईकोर्ट बोला—समान साक्ष्य पर भेदभाव नहीं

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में करीब दो दशक बाद बड़ा फैसला आया है। अमित जोगी को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने साफ कहा कि जब सभी आरोपियों के खिलाफ एक जैसे साक्ष्य हों, तो किसी एक आरोपी को अलग राहत देना न्यायसंगत नहीं है।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि समान परिस्थितियों और साक्ष्यों के बावजूद किसी एक आरोपी को बरी करना तब तक उचित नहीं माना जा सकता, जब तक उसके लिए कोई ठोस और अलग कारण साबित न हो। कोर्ट ने अमित जोगी को IPC की धारा 302 और 120-बी के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 1000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।

यह मामला 4 जून 2003 का है, जब रामावतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस केस में कुल 31 आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से 28 को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका था, जबकि 2007 में ट्रायल कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था।

बाद में जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने इस फैसले को चुनौती दी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां से इसे दोबारा सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेजा गया। जांच के दौरान पक्षपात के आरोप लगने पर केस CBI को सौंपा गया था। गौरतलब है कि इस हत्याकांड में पुलिस अधिकारियों समेत कई प्रभावशाली लोग भी दोषी पाए गए थे। हाईकोर्ट के इस ताजा फैसले ने 20 साल पुराने इस केस में एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया और समानता के सिद्धांत को रेखांकित किया है।

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