छत्तीसगढ़ में मखाना उत्पादन को प्रोत्साहन, योजना का तेजी से हो रहा क्रियान्वयन

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार नए विकल्पों को बढ़ावा दे रही है। पारंपरिक फसलों के साथ अब किसान नकदी फसलों की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं।

इसी क्रम में मखाना की खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक नया और लाभकारी अवसर बनकर उभरी है। राज्य में मखाना उत्पादन की अपार संभावनाओं को देखते हुए केन्द्र सरकार की सेंट्रल सेक्टर स्कीम फॉर डेवलपमेंट ऑफ मखाना का क्रियान्वयन तेज गति से किया जा रहा है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय मखाना बोर्ड में शामिल करने की घोषणा के बाद मखाना खेती और प्रसंस्करण गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी आई है।

उद्यानिकी विभाग के अनुसार वर्ष 2025-26 से योजना का संचालन प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत राज्य के लिए 178 लाख 11 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। योजना के क्रियान्वयन हेतु धमतरी, बालोद, महासमुंद और गरियाबंद जिलों का चयन किया गया है।

योजना के तहत मखाना उत्पादन और बीज उत्पादन की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। किसानों के तालाबों में 96.438 हेक्टेयर और भूमि पर 37.424 हेक्टेयर, कुल 133.862 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना उत्पादन प्रस्तावित है।

इसके साथ ही कृषि एवं उद्यानिकी विश्वविद्यालय तथा विभागीय रोपणियों में 15 हेक्टेयर क्षेत्र में बीज उत्पादन किया जाएगा।

धमतरी जिले में महिला स्व-सहायता समूहों और प्रगतिशील किसानों की सक्रिय भागीदारी से 55 एकड़ में तालाबों में बुवाई पूर्ण हो चुकी है। इस जिले में 43 किसान योजना से जुड़े हैं, जबकि भूमि पर उत्पादन हेतु भी तैयारियां शुरू हो गई हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार मखाना की बाजार में भारी मांग है। यदि किसान बीज को प्रोसेस कर मखाना बनाकर बेचते हैं तो उन्हें कहीं अधिक लाभ मिलता है।

ओजस फार्म की संचालक मनीषा चंद्राकर ने बताया कि छत्तीसगढ़ की जलवायु मखाना के लिए उपयुक्त है और स्वयं प्रसंस्करण व पैकेजिंग करने पर प्रति एकड़ अधिकतम लाभ संभव है। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए 2 करोड़ रुपये की कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है, जिससे मखाना उत्पादन को और गति मिलेगी।

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