मायके से मिली संपत्ति पर पति का अधिकार नहीं, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

दिल्ली। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की व्याख्या करते हुए एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी हिंदू महिला को उसके माता-पिता से संपत्ति विरासत में मिली है और उसकी मृत्यु निसंतान तथा बिना वसीयत (Intestate) किए हो जाती है, तो उस संपत्ति पर उसके पति या ससुराल पक्ष का कोई कानूनी अधिकार नहीं होगा।

क्या है कानून? (धारा 15(2)(a))

जस्टिस तारलाडा राजशेखर राव ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 15(2)(a) का हवाला देते हुए कहा कि कानून इस मामले में बेहद स्पष्ट है। यदि महिला को अपने पिता या माता से कोई संपत्ति प्राप्त हुई है और उसकी अपनी कोई संतान नहीं है, तो उसकी मृत्यु के बाद वह संपत्ति उसके पिता के कानूनी वारिसों को वापस चली जाएगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी: मेंटेनेंस और ‘झूठी’ आय

पारिवारिक विवादों से जुड़े एक अन्य मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण (Maintenance) के मामलों में अक्सर पत्नियां पति की आय को बढ़ा-चढ़ाकर बताती हैं। इसे तकनीकी रूप से ‘झूठा बयान’ (Perjury) मानकर पत्नी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती। कोर्ट ने इसे विवादों की सामान्य प्रवृत्ति माना और पति की याचिका को खारिज कर दिया। ये दोनों ही फैसले महिलाओं के संपत्ति अधिकारों और वैवाहिक विवादों में कानूनी स्थिति को और अधिक स्पष्ट करते हैं।

Exit mobile version