रायपुर। जीएसटी कलेक्शन बढ़ाने और टैक्स फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के लिए अब अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों में जीएसटी रिटर्न की जांच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित टूल्स से की जा रही है। इन हाईटेक सॉफ्टवेयर के जरिए एक जैसे बिल, रिटर्न, कंपनियों और संदिग्ध लेन-देन की पहचान कुछ ही मिनटों में हो जाती है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार एआई सिस्टम से फर्जी बोगस बिल के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने वाले मामलों का तेजी से खुलासा हो रहा है। यही वजह है कि हाल के दिनों में राज्यभर में जीएसटी गड़बड़ी से जुड़े मामलों में छापों की संख्या बढ़ी है। कई मामलों में एआई विश्लेषण के आधार पर ही कार्रवाई की जा रही है।
दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में छोटे राज्यों में टैक्स कलेक्शन का प्रतिशत घटा है। केंद्र सरकार ने ऐसे राज्यों को मॉनिटरिंग बढ़ाने और हाईटेक जांच प्रणाली अपनाने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ समेत कुछ राज्यों में टैक्स कलेक्शन वृद्धि 20 प्रतिशत से कम रही है, जिससे वसूली बढ़ाने के लिए विशेष दबाव बनाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एआई टूल्स से रिटर्न दाखिल करने के पैटर्न, संदिग्ध लेन-देन और विसंगतियों की तुरंत पहचान हो जाती है। इससे छोटे-बड़े सभी प्रकार के फर्जीवाड़े सामने आ रहे हैं। यही तकनीक टैक्स कंसल्टेंट और सीए भी उपयोग कर रहे हैं ताकि रिटर्न में गलती न रहे।
राज्य में जीएसटी वसूली बढ़ाने के लिए सभी 33 जिलों में जीएसटी कार्यालय सक्रिय हैं। विभाग का दावा है कि ऑनलाइन प्रणाली और एआई आधारित निगरानी से कलेक्शन बढ़ाने के साथ पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जा रही है।
