दिल्ली। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने घरेलू उड़ानों के किराए पर लगी ऊपरी सीमा (Fare Cap) को हटाने का निर्णय लिया है। यह आदेश 23 मार्च, 2026 से प्रभावी होगा। अब एयरलाइन कंपनियां बाजार की मांग और सीटों की उपलब्धता के आधार पर टिकट की कीमतें तय करने के लिए स्वतंत्र होंगी।
क्यों लगाई गई थी रोक?
पिछले साल दिसंबर में इंडिगो एयरलाइंस में पायलटों की कमी और ‘फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन’ (FDTL) नियमों के कारण हजारों उड़ानें रद्द हुई थीं। इस संकट का फायदा उठाकर अन्य एयरलाइंस ने किराए में अप्रत्याशित बढ़ोतरी कर दी थी, जिससे दिल्ली-मुंबई जैसी उड़ानों का टिकट ₹50,000 से ₹80,000 तक पहुंच गया था। यात्रियों को लूट से बचाने के लिए सरकार ने अधिकतम किराए की सीमा ₹18,000 तय कर दी थी।
मंत्रालय का रुख और निगरानी
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अब परिचालन सामान्य हो गया है, इसलिए सीमा हटाई जा रही है। हालांकि, नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने चेतावनी दी है कि:
- एयरलाइंस को कीमतों में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखनी होगी।
- सरकार ‘रियल टाइम’ किराए पर नजर रखेगी; अनुचित बढ़ोतरी होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- युद्ध जैसी वैश्विक स्थितियों के कारण तेल (ATF) की कीमतों में होने वाले बदलाव का असर यात्रियों पर न पड़े, इसके प्रयास किए जा रहे हैं।
यात्रियों के लिए राहत के अन्य नियम
हाल ही में सरकार ने एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया है, जिसके तहत 18 मार्च से एयरलाइंस को हर फ्लाइट में 60% सीटें बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के बुक करनी होंगी। साथ ही, एक ही PNR पर यात्रा करने वाले परिवारों को एक साथ या आसपास की सीटें देना अनिवार्य कर दिया गया है।
