मजदूर से लेकर बिजनेसमैन की बेटियों ने बनाया वर्ल्ड चैंपियनदेखिए वर्ल्डकप जीतने वाली 16 भारतीय खिलाड़ियों का फैमिली बैकग्राउंड और प्रदर्शन

दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने इतिहास रच दिया है। रविवार को मुंबई में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने साउथ अफ्रीका को 52 रन से हराकर पहली बार विमेंस वनडे वर्ल्ड कप का खिताब जीता। 52 साल पुराने टूर्नामेंट में यह भारत की पहली खिताबी जीत है।

इस जीत के पीछे मेहनत, संघर्ष और सपनों की कहानी छिपी है। टीम की 16 खिलाड़ी अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि से आती हैं। किसी के पिता दिहाड़ी मजदूर हैं तो किसी की मां ने खेतों में काम कर बेटी को क्रिकेटर बनाया।

वहीं कुछ खिलाड़ी बिजनेसमैन या सरकारी कर्मचारी परिवार से हैं। उदाहरण के तौर पर, हरियाणा की शेफाली वर्मा के पिता ज्वैलरी की दुकान चलाते हैं, जबकि यूपी की दीप्ति शर्मा के पिता रेलवे में कार्यरत रहे हैं।

फाइनल में शेफाली वर्मा ने 87 रन बनाकर और 2 विकेट लेकर ‘प्लेयर ऑफ द फाइनल’ का खिताब जीता। वहीं, दीप्ति शर्मा ने टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लिए। कप्तान हरमनप्रीत कौर की कप्तानी और टीम की एकजुटता ने भारत को यह ऐतिहासिक जीत दिलाई।

जीत के बाद स्टेडियम में जश्न का माहौल था। कप्तान हरमनप्रीत ने ट्रॉफी लेने से पहले भांगड़ा किया, जबकि चोटिल प्रतिका रावल व्हीलचेयर से उठकर डांस करती नजर आईं।

47 साल के लंबे इंतजार के बाद भारतीय महिलाओं ने क्रिकेट में नया अध्याय लिखा है। ये बेटियां अब देश की नई प्रेरणा बन चुकी हैं, जो बताती हैं कि सपने बड़े हों तो हालात मायने नहीं रखते।

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