जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में मोबाइल नेटवर्क के विस्तार ने नक्सल विरोधी अभियानों को नई ताकत दी है। पिछले दो वर्षों में यहां 3500 से अधिक मोबाइल टावर लगाए गए, जिससे संचार व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया और सुरक्षा बलों को नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में निर्णायक मदद मिली।
पहले जिन इलाकों में मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंचता था, वहां अब 4जी सेवाएं उपलब्ध हैं। इससे ग्रामीणों के साथ-साथ सुरक्षा बलों को भी फायदा हुआ है। मोबाइल कनेक्टिविटी बढ़ने से नक्सलियों की गतिविधियों और लोकेशन की सटीक जानकारी समय पर मिलने लगी, जिसके आधार पर फोर्स ने कई सफल ऑपरेशन चलाए।
मिशन 2026 के तहत सुरक्षा बलों ने सैकड़ों ऑपरेशन लॉन्च किए, जिनमें बड़ी संख्या में नक्सलियों को निष्क्रिय किया गया। बेहतर संचार व्यवस्था के कारण खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज हुआ और कार्रवाई अधिक प्रभावी बनी।
बस्तर में विभिन्न कंपनियों ने टावर लगाए हैं, जिनमें जियो के करीब 2000, बीएसएनएल के 477, एयरटेल के 175 और वीआई के 200 से अधिक टावर शामिल हैं। अंदरूनी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नेटवर्क पहुंचाने में बीएसएनएल और जियो की प्रमुख भूमिका रही है।
इसके अलावा, क्षेत्र में 150 से ज्यादा पुलिस कैंप स्थापित किए गए हैं, जिनके आसपास 10 किलोमीटर के दायरे में मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों तक भी इंटरनेट और संचार सेवाएं पहुंची हैं।
सरकार ने बस्तर और सरगुजा में 5000 से अधिक टावर लगाने का लक्ष्य रखा है, ताकि दूर-दराज के गांवों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ा जा सके।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बेहतर कनेक्टिविटी ने न केवल नक्सल गतिविधियों पर लगाम लगाई है, बल्कि बस्तर को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने में भी अहम भूमिका निभाई है।
