जम्मू-कश्मीर में तेजी से बढ़ रहा ड्रग्स का जाल, 13% आबादी नशे की चपेट में

दिल्ली। पंजाब के बाद अब जम्मू-कश्मीर भी नशे के बड़े गढ़ के रूप में उभर रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की करीब 1.3 करोड़ आबादी में से 13.5 लाख लोग ड्रग्स की चपेट में हैं। यानी हर 100 में से 13 लोग किसी न किसी नशे से प्रभावित हैं। साल 2022 में यह आंकड़ा करीब 6 लाख था, जो अब दोगुने से ज्यादा हो चुका है।

अधिकारियों के अनुसार, आतंकवाद के साथ-साथ ड्रग्स नेटवर्क भी जम्मू-कश्मीर के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पुलिस महानिदेशक Nalin Prabhat ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और ड्रग्स तस्करी को गंभीर खतरा बताया है। इसके बाद सरकार ने ड्रग्स माफिया के खिलाफ 100 दिन का विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान से अब तक 1 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं।

दक्षिण कश्मीर के मोहम्मद अमीन ने बताया कि उनका बेटा वकील बनना चाहता था, लेकिन स्कूल में सिगरेट की लत से शुरुआत हुई और धीरे-धीरे वह चरस और हेरोइन तक पहुंच गया। नशे के लिए उसने घर का सामान तक बेचना शुरू कर दिया। वहीं ड्रग्स की लत छोड़ चुके आदिल भट का कहना है कि इसके पीछे संगठित गिरोह सक्रिय हैं, जिनके तार पंजाब के ड्रग डीलरों से जुड़े हैं। सीमावर्ती इलाकों के जरिए नशीले पदार्थ जम्मू-कश्मीर पहुंचाए जा रहे हैं।

सरकार ने अब तक 165 ड्रग्स हॉटस्पॉट चिन्हित किए हैं और NDPS एक्ट के तहत 704 एफआईआर दर्ज की गई हैं। अभियान के दौरान 830 से ज्यादा नशेड़ियों और तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।

प्रशासन ने ड्रग्स कारोबारियों पर सख्ती बढ़ाते हुए उनके आधार कार्ड, पासपोर्ट, हथियार लाइसेंस, ट्रेड लाइसेंस और ड्राइविंग लाइसेंस तक रद्द करने शुरू कर दिए हैं। अब तक 300 ड्राइविंग लाइसेंस, 130 वाहन रजिस्ट्रेशन और 110 मेडिकल स्टोर के लाइसेंस सस्पेंड किए जा चुके हैं।

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