दिल्ली। देश में खेलों के क्षेत्र में डोपिंग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्टेडियम के वॉशरूम में इस्तेमाल की गई सिरिंजें मिलना, एथलीट्स का डोप टेस्ट में फेल होना और अब सामान्य दवाओं के प्रिस्क्रिप्शन के जरिए भी प्रतिबंधित पदार्थों का खेलों में पहुंचना चिंता का विषय बन गया है। इस स्थिति को देखते हुए नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने डॉक्टरों, अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए हैं।
एनएमसी ने हाल ही में एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर कहा है कि एथलीट्स का इलाज करते समय एंटी-डोपिंग नियमों का सख्ती से पालन किया जाए।
यह कदम युवा मामले एवं खेल मंत्रालय की चिंता के बाद उठाया गया। मंत्रालय ने बढ़ते डोपिंग मामलों को लेकर एनएमसी से आग्रह किया था कि डॉक्टरों को वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (वाडा) की प्रतिबंधित दवाओं की सूची से अवगत कराया जाए। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि डॉक्टर केवल चिकित्सकीय रूप से आवश्यक दवाएं ही लिखें और उनका पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
एनएमसी ने मेडिकल कॉलेजों से फैकल्टी और प्रैक्टिशनर्स को एंटी-डोपिंग नियमों के प्रति संवेदनशील बनाने को कहा है। साथ ही अंडरग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा और कंटिन्यूइंग प्रोफेशनल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स में एंटी-डोपिंग जागरूकता शामिल करने का सुझाव दिया गया है, ताकि भविष्य के डॉक्टर इस मुद्दे की गंभीरता समझ सकें।
डोपिंग के हालिया मामलों ने भी चिंता बढ़ाई है। नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (नाडा) ने 2025 में सात भारतीय एथलीट्स को अस्थायी रूप से निलंबित किया था। 5 जनवरी 2026 को उत्तराखंड के क्रिकेटर राजन कुमार तीन प्रतिबंधित पदार्थों के लिए पॉजिटिव पाए गए।
कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में वॉशरूम से इस्तेमाल की गई सिरिंजें मिलने की घटनाएं भी सामने आई हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खेलों की साख बचाने के लिए डॉक्टरों, कोचों और खिलाड़ियों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।
