डिजिटल ऋण पुस्तिका राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी, सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम: मंत्री टंकराम वर्मा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में डिजिटल शासन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए आज डिजिटल किसान किताब और डिजिटल ऋण पुस्तिका का शुभारंभ किया गया।

राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने अपने निवास कार्यालय में इसका औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर उमेश कुमार पटेल और श्रीकांत वर्मा द्वारा लिखित ‘छत्तीसगढ़ भू-अभिलेख नियमावली’ भाग 1 से 4 का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में संचालक भू-अभिलेख विनीत नन्दनवार सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

डिजिटल किसान किताब अब पारंपरिक मैन्युअल किसान किताब का स्थान लेगी। इसके माध्यम से किसान अपनी भूमि से संबंधित जानकारी कहीं से भी और कभी भी ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे।

यह सुविधा भुइया पोर्टल पर बी-1 एवं पी-2 रिपोर्ट के साथ उपलब्ध रहेगी, जिसे किसान आसानी से देख और डाउनलोड कर सकेंगे। डिजिटल प्रणाली में भूमि से जुड़े सभी विवरण स्वतः अपडेट होते रहेंगे, जिससे संशोधन के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

डिजिटल ऋण पुस्तिका से संबंधित प्रमाणित प्रतियां पटवारी के डिजिटल हस्ताक्षर के साथ उपलब्ध होंगी, जिससे दस्तावेजों की वैधता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

इससे किसानों को बैंक ऋण, फसल ऋण और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी। मंत्री वर्मा ने कहा कि यह पहल केवल तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी, सशक्त और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।

उन्होंने बताया कि डिजिटल प्रणाली से त्रुटियों में कमी आएगी, अभिलेखों की शुद्धता बढ़ेगी और प्रशासनिक प्रक्रिया सरल व प्रभावी बनेगी।

यह पहल “डिजिटल छत्तीसगढ़” की परिकल्पना को मजबूती देगी और शासन तथा नागरिकों के बीच विश्वास को और सुदृढ़ करेगी। अंत में उन्होंने राजस्व विभाग, एनआईसी और परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों व तकनीकी टीम को बधाई देते हुए नागरिकों से इस डिजिटल सुविधा का अधिकतम उपयोग करने की अपील की।

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