रायपुर। छत्तीसगढ़ में छात्र राजनीति एक बार फिर गरमाने वाली है। NSUI (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) ने प्रदेश के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में लंबे समय से लंबित छात्रसंघ चुनावों को बहाल कराने के लिए शंखनाद कर दिया है। मंगलवार को रायपुर स्थित कांग्रेस मुख्यालय ‘राजीव भवन’ में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता में संगठन ने चरणबद्ध आंदोलन की विस्तृत रूपरेखा साझा की।
NSUI के प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रसंघ चुनाव न होने से प्रदेश के लाखों छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है। छात्र अपनी समस्याओं को मजबूती से रखने के लिए एक निर्वाचित मंच से वंचित हैं, जिसके कारण विश्वविद्यालयों में तानाशाही बढ़ रही है।
आंदोलन की रणनीति: दो प्रमुख चरण
संगठन ने शासन-प्रशासन को जगाने के लिए दो चरणों में विरोध प्रदर्शन का निर्णय लिया है:
27 मार्च: प्रदेश के सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके जरिए छात्रसंघ चुनावों को तुरंत बहाल करने की संवैधानिक गुहार लगाई जाएगी।
06 अप्रैल: आंदोलन को व्यापक रूप देते हुए प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों का एक साथ घेराव किया जाएगा। हजारों की संख्या में छात्र एकजुट होकर अपनी मांगों का प्रदर्शन करेंगे।
प्रमुख मुद्दे जिन पर होगा संघर्ष
NSUI ने केवल चुनाव ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक व्यवस्था में व्याप्त अन्य विसंगतियों को भी आंदोलन का आधार बनाया है:
शिक्षा की गुणवत्ता: कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी और बढ़ती फीस।
प्रशासनिक लापरवाही: परीक्षा और परिणामों में लगातार हो रही अनियमितताएं।
सुविधाओं का अभाव: छात्रवृत्ति में देरी, हॉस्टल की जर्जर स्थिति और डिजिटल संसाधनों की कमी।
भविष्य की चिंता: प्लेसमेंट सेल की निष्क्रियता और परिवहन संबंधी समस्याएं।
