मूक-बधिर युवती ने गुड़िया के जरिए बयां किया दर्द: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुनाई उम्रकैद, कहा- ‘इशारों की गवाही भी मान्य’

बिलासपुर । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मूक-बधिर युवती के साथ हुए अनाचार के मामले में एक ऐतिहासिक और संवेदशनशील फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी रिश्तेदार को ‘मरते दम तक उम्रकैद’ की सजा सुनाई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बोलने और सुनने में अक्षम व्यक्ति द्वारा संकेतों (Sign Language) के माध्यम से दी गई गवाही पूरी तरह कानूनी साक्ष्य है।

प्लास्टिक की गुड़िया बनी गवाही का आधार

यह मामला बालोद जिले के अर्जुंदा थाना क्षेत्र का है। जुलाई 2020 में जब 20 वर्षीय मूक-बधिर युवती घर में अकेली थी, तब उसके रिश्तेदार नीलम कुमार देशमुख ने घर में घुसकर दुष्कर्म किया। पीड़िता बोल नहीं सकती थी, इसलिए ट्रायल कोर्ट में उसकी गवाही दर्ज कराना बड़ी चुनौती थी। सुनवाई के दौरान साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट की मदद ली गई और पीड़िता ने प्लास्टिक की गुड़िया का सहारा लेकर इशारों में समझाया कि आरोपी ने उसके साथ क्या गलत किया।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी: ‘संकेत भी मौखिक साक्ष्य हैं’

निचली अदालत के फैसले के खिलाफ जब आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील की, तो जस्टिस की बेंच ने पीड़िता की गवाही को अटूट माना। कोर्ट ने कहा, कि “केवल मूक-बधिर होने के आधार पर किसी गवाह को खारिज नहीं किया जा सकता। साक्ष्य अधिनियम के तहत संकेतों के माध्यम से दी गई जानकारी भी ‘मौखिक साक्ष्य’ की श्रेणी में आती है।”

वैज्ञानिक साक्ष्यों ने पुख्ता किया जुर्म

पीड़िता के बयानों के अलावा, मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने भी अपराध की पुष्टि की। फॉरेंसिक जांच में आरोपी के कपड़ों पर मिले साक्ष्य और पीड़िता की स्लाइड्स से जुर्म साबित हुआ, जिसका आरोपी के पास कोई बचाव नहीं था।

हाईकोर्ट ने आरोपी को धारा 376(2) के तहत प्राकृतिक मृत्यु होने तक उम्रकैद और धारा 450 के तहत 5 साल की जेल की सजा सुनाई है। साथ ही 21 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस फैसले ने यह संदेश दिया है कि शारीरिक अक्षमता न्याय के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती।

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