रायपुर में रसोइयों की हड़ताल: 2 महिलाओं की मौत, 30 दिन से धरना जारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में लगभग 86,000 रसोइया पिछले 30 दिनों से न्यूनतम मानदेय, स्थायीकरण और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर इस आंदोलन के दौरान 2 महिला रसोइयों की तबीयत बिगड़ गई, जिनका इलाज चलता रहा लेकिन दोनों की मौत हो गई।

मृतकों में दुलारी यादव बेमेतरा जिले के सालधा गांव की रहने वाली थी। उन्हें हार्ट और मेटाबोलिक समस्या थी। 25 जनवरी को रायपुर के डॉ. बीआर अम्बेडकर मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, हालत गंभीर होने पर निजी अस्पताल में रेफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। दूसरी मृतक रुकमणि सिन्हा बालोद जिले के कुसुमकासा की रहने वाली थीं। आंदोलन में शामिल रहने के बाद उनका स्वास्थ्य बिगड़ा और 26 जनवरी को राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज में उनका निधन हो गया।

कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि रसोइयों की मांगों को नजरअंदाज करने के कारण महिलाओं की जान गई। वहीं लोक शिक्षण संचालनालय ने कहा कि मौतें सीधे धरना स्थल से संबंधित नहीं हैं।

रसोइया संघ के प्रदेश अध्यक्ष रामराज कश्यप ने कहा कि सरकार ने मानदेय बढ़ाने का वादा किया था, लेकिन ठोस कदम नहीं उठाए। आंदोलनकारियों में आक्रोश बढ़ गया है। संघ ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने और लंबित मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

छत्तीसगढ़ स्कूल मिड-डे मील यूनियन के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं। सरकार को रसोइयों की मांगों पर ध्यान देने और आंदोलन को समाप्त कराने के लिए तत्काल पहल करने की आवश्यकता है, ताकि आगे किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

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