रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब की पैकेजिंग को कांच की बोतलों से बदलकर प्लास्टिक (RPET) में करने के सरकार के प्रस्तावित फैसले ने तूल पकड़ लिया है।
इस निर्णय के विरोध में छत्तीसगढ़ बोतल संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को आबकारी कमिश्नर आर. सांगीता से मुलाकात कर अपनी चिंताओं का ज्ञापन सौंपा और इस फैसले पर तत्काल पुनर्विचार की मांग की।
व्यापारियों पर आर्थिक संकट का साया
संघ के प्रतिनिधिमंडल ने आयुक्त को बताया कि अचानक लिए गए इस फैसले से कांच की बोतलों का भारी स्टॉक व्यापारियों के पास डंप हो गया है।
यदि बिना किसी पूर्व सूचना के प्लास्टिक बोतलों की व्यवस्था लागू की जाती है, तो कांच के व्यापार से जुड़े लोगों को करोड़ों का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। व्यापारियों ने मांग की है कि पुराने स्टॉक को निकालने के लिए कम से कम 6 महीने का समय दिया जाए।
सेहत और पर्यावरण पर बड़ा खतरा
बोतल संघ ने केवल व्यापारिक ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरणीय आधार पर भी इस फैसले का विरोध किया है:
माइक्रोप्लास्टिक का डर: विशेषज्ञों के हवाले से संघ ने दावा किया कि प्लास्टिक बोतलों में शराब रखने से रासायनिक प्रतिक्रिया हो सकती है, जिससे माइक्रोप्लास्टिक के कण सेहत को गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं।
आजीविका पर संकट: कांच की बोतलों के संग्रहण और रीसाइक्लिंग कार्य से प्रदेश के हजारों गरीब परिवार जुड़े हैं। प्लास्टिक आने से उनकी रोजी-रोटी छिन जाएगी।
प्रदूषण: प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन की चुनौती राज्य में और अधिक गंभीर हो जाएगी।
आबकारी कमिश्नर आर. सांगीता ने संघ की मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया है। हालांकि, संघ ने दो टूक शब्दों में कहा है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन मजदूरों और व्यापारियों के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
