बिलासपुर। बिलासपुर रेलवे कोचिंग यार्ड में वंदे भारत एक्सप्रेस के अतिरिक्त कोच की सफाई के दौरान करंट लगने से ठेका मजदूर प्रताप बर्मन की मौत हो गई। घटना के बाद रेलवे अधिकारियों द्वारा जानकारी छिपाए जाने पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने रेलवे के जीएम को तीन दिन के भीतर शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
23 अगस्त को जांजगीर-चांपा जिले के मुलमुला निवासी प्रताप बर्मन एसी सुधारने कोच पर चढ़ा था। इसी दौरान OHE हाइटेंशन तार की चपेट में आकर झुलस गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि बिजली सप्लाई बंद किए बिना ही उसे काम पर भेजा गया, जो अफसरों और ठेकेदार की गंभीर लापरवाही है।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि रेलवे ने मजदूर की मौत की जानकारी और अपोलो अस्पताल में हुए हंगामे को छिपाया। इससे नाराज बेंच ने जीएम और डीआरएम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से तलब किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट में हादसे की पूरी जानकारी, मुआवजे और ठेकेदार पर की गई कार्रवाई का ब्योरा होना चाहिए। अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।
इधर, मृतक के परिजनों ने नौकरी, मुआवजे और बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी की मांग की है। गुस्साए ग्रामीण और परिजन डीआरएम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए हैं और शव रखकर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। पत्नी खुशबू बर्मन का कहना है कि हादसे ने उसका सब कुछ छीन लिया, अब रेलवे को परिवार की जिम्मेदारी उठानी चाहिए।