खैरागढ़। खैरागढ़ की प्रतिष्ठित समाज सेविका और महिला कांग्रेस की पूर्व शहर अध्यक्ष शिला रानी महोबे का हार्ट अटैक से निधन हो गया। उनका जाना नगर के लिए बड़ी क्षति है, और उनके निधन से पूरा शहर शोक में डूब गया। शिला रानी महोबे न केवल राजनीति में सक्रिय थीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही थीं।
अंतिम संस्कार के दौरान एक भावुक पल आया, जब उनकी बड़ी बेटी दिव्या महोबे ने परंपरा के तहत मुखाग्नि देने का निर्णय लिया। आमतौर पर यह जिम्मेदारी बेटों की मानी जाती है, लेकिन दिव्या ने सफेद साड़ी पहनकर यह साबित कर दिया कि कर्तव्य और संस्कार में कोई भेदभाव नहीं होता।
उन्होंने समाज को नई दिशा दिखाते हुए यह संदेश दिया कि बच्चों का कर्तव्य सिर्फ परंपराओं तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह प्रेम और श्रद्धा से भी जुड़ा होता है। अंतिम संस्कार कृषि उपज मंडी मुक्तिधाम में हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। हर किसी की आंखें नम थीं, लेकिन दिव्या की हिम्मत और संस्कारों की सराहना की गई। इस कठिन समय में उनकी छोटी बहन दीक्षा भी उनकी मदद करती नजर आईं। दिव्या ने यह दिखा दिया कि माता-पिता के प्रति प्रेम और कर्तव्य सबसे ऊपर होता है, फिर वह बेटा हो या बेटी।