तुकाराम मुंढे सदस्य सचिव नियुक्त; जांच पूरी होने तक छुट्टी पर गए आयोग के अध्यक्ष, 70 हजार पदों पर भर्ती का रोडमैप मांगा
मुंबई। महाराष्ट्र में राज्य लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों को लेकर चल रहा अभ्यर्थियों का प्रदर्शन 10 दिन बाद खत्म हो गया। राज्य सरकार ने रविवार को आयोग में सुधार और पेपर लीक मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की है। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे को कमेटी का सदस्य सचिव बनाया गया है।
कमेटी की अध्यक्षता बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज दिलीप भोसले करेंगे। इसमें आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी गौतम, पूर्व आईएएस अधिकारी गणेश पाटिल और रिटायर्ड जज पीडी नाइक भी शामिल हैं। महाराष्ट्र के मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने पुणे में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को कमेटी के गठन की जानकारी दी।
जांच पूरी होने तक छुट्टी पर रहेंगे अध्यक्ष
अभ्यर्थियों ने 30 जून को छत्रपति संभाजीनगर में कंप्यूटर आधारित परीक्षा कराने के फैसले के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था। उनकी मांग थी कि परीक्षाएं ऑफलाइन कराई जाएं। प्रदर्शनकारियों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, खाली पदों पर नियुक्ति और आंदोलनकारियों पर दर्ज केस वापस लेने की भी मांग की थी।
मंत्री ने तीन साल में 70 हजार पदों पर भर्ती, जनवरी में होने वाली ग्रुप-सी परीक्षा में सीटें बढ़ाने और आयोग के अध्यक्ष-सचिव की नियुक्ति से पहले उनके बैकग्राउंड की जांच कराने का भरोसा दिया। इसके बाद MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने न्यायिक जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने की घोषणा की।
इंटरव्यू के बाद रद्द हुई भर्ती परीक्षा
अगस्त में ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में पेपर लीक का मामला सामने आया था। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में ड्रग इंस्पेक्टर, ग्रुप-बी पदों के लिए परीक्षा 22 मार्च 2026 को हुई थी। जुलाई में परिणाम जारी होने के बाद अभ्यर्थियों के इंटरव्यू भी हुए, लेकिन पेपर लीक का मामला सामने आने पर आयोग ने भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी।
इस मामले के बाद अभ्यर्थियों का आक्रोश बढ़ गया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 7 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार से 70 हजार रिक्त पदों और भर्ती प्रक्रिया पर तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा था। सरकार को भर्ती का रोडमैप पेश करना होगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी आयोग की जांच कराने की बात कही है।
