रायपुर। सही समय पर बीमारी की पहचान और त्वरित उपचार किसी भी जीवन को नई दिशा दे सकता है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत संचालित चिरायु योजना धमतरी जिले के 10 वर्षीय त्रिशांत यादव के लिए जीवनदायिनी साबित हुई।
योजना के तहत समय पर जन्मजात हृदय रोग की पहचान होने से त्रिशांत का सफल और पूरी तरह निःशुल्क हृदय ऑपरेशन कराया गया। अब त्रिशांत स्वस्थ है और सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।
धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड अंतर्गत ग्राम सिंधौरीखुर्द निवासी त्रिशांत को अपने दिल की बीमारी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। वह रोज की तरह स्कूल जाता था।
इसी दौरान स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए पहुंची चिरायु टीम ने जांच के दौरान उसके दिल की धड़कनों में असामान्यता महसूस की। टीम ने गंभीरता को समझते हुए तत्काल परिजनों से संपर्क किया और आगे की जांच के लिए सलाह दी।
चिरायु टीम की पहल पर त्रिशांत को जिला अस्पताल धमतरी ले जाया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने जांच के बाद जन्मजात हृदय रोग की पुष्टि की। बच्चे के शीघ्र उपचार की आवश्यकता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पूरी प्रक्रिया तेजी से पूरी कर उसे रायपुर के एमएमआई अस्पताल रेफर कराया।
8 जुलाई 2026 को विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने त्रिशांत का सफल हृदय ऑपरेशन किया। इलाज पूरी तरह निःशुल्क हुआ। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों की निगरानी में त्रिशांत तेजी से स्वस्थ हो रहा है।
त्रिशांत के माता-पिता ने बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण महंगा इलाज कराना संभव नहीं था।
बीमारी का पता चलने के बाद वे काफी चिंतित थे, लेकिन चिरायु योजना की मदद से उनके बच्चे को नया जीवन मिला। उन्होंने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार जताया।
चिरायु योजना केवल स्वास्थ्य जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों में जन्मजात बीमारियों की पहचान, इलाज, रेफरल और फॉलो-अप तक पूरी जिम्मेदारी निभाती है।
धमतरी जिले में त्रिशांत की कहानी इस बात का उदाहरण है कि समय पर जांच और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से बच्चों का भविष्य सुरक्षित बनाया जा सकता है।
