मनरेगा में छत्तीसगढ़ की बड़ी छलांग: तकनीक से पारदर्शिता, देश के अग्रणी राज्यों में शामिल

रायपुर। राजधानी रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के प्रभावी क्रियान्वयन में राज्य ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है, जहां तकनीक के उपयोग से पारदर्शिता और कार्यकुशलता को नई गति मिली है।

राज्य में 1 अप्रैल 2026 तक 97 प्रतिशत सक्रिय श्रमिकों का ई-केवायसी पूरा कर लिया गया है। इसके तहत 58.16 लाख श्रमिकों का ई-केवायसी और 11.32 लाख परिसंपत्तियों का जियो-टैगिंग कार्य संपन्न हुआ है। इससे भुगतान प्रणाली अधिक पारदर्शी बनी है और कार्यों की प्रभावी मॉनिटरिंग संभव हो पाई है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से 11,668 ग्राम पंचायतों में 2.86 लाख से अधिक कार्यों की जीआईएस आधारित कार्ययोजना तैयार की गई है। इससे स्थानीय जरूरतों के अनुसार वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्यों का चयन किया जा रहा है।

मनरेगा कार्यस्थलों पर फेस ऑथेंटिकेशन आधारित एनएमएमएस (NMMS) प्रणाली लागू की गई है, जिससे श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज करने में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ी है। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों में लगाए गए क्यूआर कोड के जरिए आम नागरिक भी कार्यों की पूरी जानकारी सीधे अपने मोबाइल पर प्राप्त कर सकते हैं। अब तक करीब 5 लाख से अधिक क्यूआर कोड स्कैन किए जा चुके हैं।

प्रदेश में हर माह की 7 तारीख को “रोजगार दिवस” और “आवास दिवस” मनाया जा रहा है, जहां हितग्राहियों की समस्याओं का मौके पर समाधान किया जाता है। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी समीक्षा भी सुनिश्चित हो रही है।

राज्य सरकार के इन प्रयासों से मनरेगा में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी मजबूत हुई है, जो ग्रामीण विकास के लिए सकारात्मक संकेत है।

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