रायपुर। इंदौर में सामने आए हनीट्रैप-2 मामले ने चार राज्यों की राजनीति, पुलिस और कारोबारी जगत में हलचल मचा दी है। जांच में छत्तीसगढ़ के एक DIG रैंक के अधिकारी का नाम सामने आने के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है। इंदौर क्राइम ब्रांच को अब तक 100 से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं, जिनमें कई नेताओं, अफसरों और कारोबारियों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है।
पुलिस के मुताबिक, यह पूरा रैकेट बेहद सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा था। भोपाल निवासी श्वेता विजय जैन इस नेटवर्क को ऑपरेट करती थी, जबकि रेशू चौधरी प्रभावशाली लोगों से संपर्क साधकर उन्हें जाल में फंसाने का काम करती थी। आरोप है कि वीडियो बनाकर रसूखदार लोगों को ब्लैकमेल किया जाता था और करोड़ों रुपए की वसूली की जाती थी।
जांच एजेंसियों को डिजिटल डिवाइस से कई संवेदनशील वीडियो और चैट मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली के एक बड़े नेता से 4 करोड़ रुपए वसूलने की साजिश भी रची गई थी। मामले में गुजरात के एक उद्योगपति और मध्य प्रदेश के कुछ नेताओं के नाम भी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब इंदौर के कारोबारी हितेंद्र उर्फ चिंटू ठाकुर ने शिकायत दर्ज कराई। कारोबारी ने आरोप लगाया कि सुपर कॉरिडोर इलाके में अलका दीक्षित और उसके साथियों ने मारपीट कर वीडियो वायरल करने की धमकी दी थी।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए जयदीप, लाखन चौधरी, पत्रकार जितेंद्र पुरोहित और हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अब पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस नेटवर्क को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण तो नहीं मिला था। वहीं छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में DIG स्तर के अधिकारी के नाम को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
