रायपुर।छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में आज धान के उठाव में देरी और बस्तर संभाग में आंगनबाड़ी केंद्रों की दयनीय स्थिति को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। सक्ती जिले में धान उठाव रुकने से हुए नुकसान और बस्तर में बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर सदन में तीखी बहस हुई।
धान उठाव पर तकरार: ‘रिसाइक्लिंग’ रोकने का तर्क
विधायक रामकुमार यादव ने आरोप लगाया कि 17 जनवरी से धान का उठाव रोकने की वजह से किसानों का करोड़ों का धान बारिश में भीगकर खराब हो गया। उन्होंने सवाल उठाया कि पर्याप्त राइस मिल होने के बावजूद उठाव क्यों रोका गया? उन्होंने यह दावा भी किया कि सक्ती जिले में 30 करोड़ रुपये का धान चूहों ने खा लिया।
इस पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने सफाई दी कि धान की ‘रिसाइक्लिंग’ (पुराने धान को दोबारा खपाने) को रोकने के लिए अस्थायी तौर पर उठाव रोका गया था। उन्होंने आश्वस्त किया कि सक्ती जिले का 90% से अधिक धान उठाया जा चुका है और शेष 31 मार्च तक उठा लिया जाएगा। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने इस पर पलटवार करते हुए पूछा कि यदि रिसाइक्लिंग हो रही थी, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई?
बस्तर की आंगनबाड़ियों में संकट
बस्तर संभाग के केंद्रों का मुद्दा उठाते हुए विधायक लखेश्वर बघेल ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि 2209 केंद्र बिना भवन के संचालित हो रहे हैं। 1021 भवन जर्जर अवस्था में हैं। 4200 केंद्रों में शौचालय और 3445 में पेयजल की सुविधा नहीं है।
विधायक ने सवाल किया कि बिना बुनियादी सुविधाओं के सरकार नर्सरी कक्षाएं कैसे शुरू करेगी? महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने जवाब दिया कि भवनों और सुविधाओं के लिए स्वीकृतियां दी जा रही हैं और बजट की उपलब्धता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से कार्य कराया जाएगा।
