UPI से अधिक पेमेंट करने पर लगेगा चार्ज,बैंकों पर बढ़ रहा बोझ; RBI ने दिया जवाब

दिल्ली। देश में डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके यूपीआई (UPI) के जरिए छोटे-छोटे भुगतान तेजी से बढ़ रहे हैं। पांच, दस या बीस रुपये तक के लेनदेन भी अब लोग यूपीआई से कर रहे हैं। हालांकि, इस बढ़ती प्रवृत्ति ने बैंकों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि प्रत्येक ट्रांजेक्शन को प्रोसेस करने में उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकारियों के अनुसार, बाजार में छोटे मूल्यवर्ग के नोटों की कमी के कारण लोग यूपीआई का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2026 तक प्रचलन में दो और पांच रुपये के नोटों की हिस्सेदारी घटकर 6.4 प्रतिशत रह गई है। इसी तरह 10 और 20 रुपये के नोटों की उपलब्धता में भी कमी दर्ज की गई है।

बैंकिंग सूत्रों का कहना है कि एक यूपीआई ट्रांजेक्शन पर बैंकों का औसत खर्च 1 से 2 रुपये तक आता है। ट्रांजेक्शन की संख्या लगातार बढ़ने से बैंकों को अपने आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्वर क्षमता पर अधिक निवेश करना पड़ रहा है। चूंकि ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता, इसलिए पूरी लागत बैंकों को वहन करनी पड़ती है।

इसी वजह से कई बैंक आरबीआई से एक निश्चित सीमा से अधिक यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने की अनुमति देने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यूपीआई पर किसी प्रकार का शुल्क लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। आरबीआई गवर्नर ने भी कहा है कि वर्तमान में यूपीआई उपयोगकर्ताओं को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।

इस बीच, आरबीआई ने बैंकों को 50 और 100 रुपये के नोटों की उपलब्धता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए एटीएम मशीनों को अपग्रेड करना होगा, लेकिन कई बैंक अतिरिक्त खर्च के कारण इसके लिए तैयार नहीं हैं।

एनपीसीआई के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई के जरिए 314 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ। हर महीने 20 अरब से ज्यादा ट्रांजेक्शन हो रहे हैं, जिनमें अधिकांश भुगतान 500 रुपये से कम राशि के हैं। यही कारण है कि यूपीआई का बढ़ता उपयोग बैंकिंग प्रणाली के लिए नई चुनौतियां भी खड़ी कर रहा है।

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