रायपुर। कल, 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो रहा है। छत्तीसगढ़ के प्रमुख देवी मंदिरों और शक्तिपीठों में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। ज्योतिषविदों के अनुसार, वर्षों बाद इस बार कलश स्थापना अमावस्या तिथि में होगी, जिसे अत्यंत शुभ माना जा रहा है। साथ ही शुक्ल और ब्रह्म योग का दुर्लभ संयोग इस नवरात्रि के महत्व को और बढ़ा रहा है।
डोंगरगढ़: श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रबंध
मां बम्लेश्वरी की नगरी डोंगरगढ़ में भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे ने 10 एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टॉपेज दिया है। इसके अलावा, दुर्ग-डोंगरगढ़ के बीच स्पेशल ट्रेनें और 4 लोकल गाड़ियों का विस्तार किया गया है। पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक जाने के लिए रोपवे और सीढ़ियों की व्यवस्था के साथ-साथ पुलिस ने आपात स्थिति के लिए क्विक रिस्पांस टीम (QRT) तैनात की है।
सात समंदर पार से भी बढ़ी आस्था
डिजिटल दौर में माता के प्रति आस्था भौगोलिक सीमाओं को लांघ चुकी है। रायपुर के महामाया मंदिर सहित अन्य शक्तिपीठों में NRI और विदेशी नागरिकों ने ज्योति कलश के लिए एडवांस बुकिंग कराई है। कई मंदिरों ने UPI और ऑनलाइन दर्शन की सुविधा दी है, जिससे विदेशों में बैठे भक्त भी भोग और श्रृंगार अर्पित कर सकेंगे।
प्रमुख शक्तिपीठों की झलक:
- दंतेश्वरी (दंतेवाड़ा): 52 शक्तिपीठों में से एक, यहाँ 4100 रुपये में चांदी के सिक्के उपलब्ध होंगे। गर्भगृह में प्रवेश के लिए पारंपरिक वेशभूषा अनिवार्य है।
- महामाया (रतनपुर): पार्किंग की समस्या दूर करने के लिए 20 एकड़ में नया पार्किंग जोन बनाया गया है।
- चंद्रहासिनी (सक्ती): यहाँ 100 फीट ऊंची महादेव-पार्वती की प्रतिमा आकर्षण का केंद्र रहेगी।
- अंगार मोती (धमतरी): गंगरेल बांध के डूबान क्षेत्र से विस्थापित माता के दर्शन के लिए विशेष भंडारे की व्यवस्था है।
- चंडी माता (महासमुंद): यहाँ आरती के समय भालुओं का आगमन भक्तों के लिए कौतूहल का विषय रहता है।
प्रशासन ने सभी प्रमुख मंदिरों में पेयजल, स्वास्थ्य शिविर और भीषण गर्मी से बचाव के लिए ‘ग्रीन नेट’ की व्यवस्था की है।
