रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल ने जेल में बिताए 170 दिनों के अनुभव साझा करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के पॉडकास्ट में जेल की बदहाल स्थिति का खुलासा किया। चैतन्य ने कहा कि जेल में हालात बेहद अमानवीय थे, जहां पीने के पानी में कीड़े मिलते थे और इलाज की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी।
उन्होंने बताया कि रायपुर सेंट्रल जेल में उन्हें 10×7 फीट के आइसोलेटेड सेल में रखा गया था, जहां एक ही कमरे में खाना और शौचालय था। किसी तरह का पार्टिशन नहीं था, जिससे मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की परेशानी होती थी। उन्होंने कहा कि जेल में बीमार कैदी खुद ही इंजेक्शन लगाते थे और ड्रेसिंग करते थे, क्योंकि डॉक्टर या प्रोफेशनल स्टाफ की समुचित व्यवस्था नहीं थी।
चैतन्य ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं के साथ जेल में ज्यादा खराब व्यवहार किया जाता है। उन्होंने बताया कि विधायक कवासी लखमा को सीने में दर्द की शिकायत के बावजूद समय पर इलाज नहीं मिला। परिवार और पार्टी नेताओं के दबाव के बाद ही उन्हें अस्पताल भेजा गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि जेल निरीक्षण के दौरान जज को वही दिखाया जाता है, जो अधिकारी दिखाना चाहते हैं।
चैतन्य ने कहा कि कुछ वार्डों में पानी की इतनी कमी थी कि कैदी नाली के पानी से टॉयलेट का इस्तेमाल करने को मजबूर थे। उन्होंने जेल व्यवस्था को मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन बताया।
इसी पॉडकास्ट में भूपेश बघेल ने भी दावा किया कि भाजपा में शामिल न होने पर उनके खिलाफ लगातार छापेमारी की गई। उल्लेखनीय है कि चैतन्य बघेल को 18 जुलाई 2025 को ईडी ने शराब घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया था और 2 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट से जमानत मिली।
