पंजाब से भूपेश बघेल की छुट्टी: सचिन पायलट को कमान; क्या कांग्रेस में घट रहा है बघेल का कद? जानिए पूरा सियासी समीकरण

रायपुर। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और AICC महासचिव भूपेश बघेल को पंजाब प्रभारी पद से हटाकर असम की जिम्मेदारी सौंप दी है।

उनकी जगह पूर्व राजस्थान उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाया गया है। पार्टी का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब पंजाब कांग्रेस अंदरूनी गुटबाजी से जूझ रही है और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है।

क्या पंजाब में बघेल की रणनीति रही नाकाम?

पंजाब में बघेल के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खेमों के बीच चल रही खींचतान थी।

बघेल ने दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की, लेकिन विवाद खत्म नहीं हुआ। जुलाई-अगस्त में उनके पंजाब दौरे के दौरान भी संगठनात्मक मतभेद खुलकर सामने आए।

पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कांग्रेस के सीनियर लीडरों के कहने पर पंजाब में जब दौरा किया, तो गुटीय संघर्ष कम होने के बजाय कई जगह और सार्वजनिक हो गया।

भूपेश बघेल चन्नी और वडिंग के बीच तालमेल बनाने में सफल नहीं हो पाए। पंजाब संगठन में एक वर्ग बघेल के प्रभावी तरीके से स्थिति संभाल नहीं पाने को लेकर सवाल उठा रहा था।

सचिन पायलट को जिम्मेदारी क्यों ?

पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। कांग्रेस को सत्ता में वापसी के लिए संगठन की गुटबाजी खत्म करने और अलग-अलग सामाजिक समीकरणों को साधने की जरूरत है।

ऐसे में सचिन पायलट की नियुक्ति को हाईकमान की नई रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पायलट को संगठन में सक्रिय, अपेक्षाकृत युवा और विभिन्न गुटों के साथ संवाद कायम करने वाले नेता के तौर पर पेश किया जा रहा है।

क्या बघेल कांग्रेस में कमजोर हो रहे हैं?

यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि बघेल को लगातार दो बड़े संगठनात्मक मोर्चों पर बदलाव का सामना करना पड़ा है। हालांकि, सिर्फ पंजाब से हटाए जाने को उनके राजनीतिक कद में गिरावट मानना पूरी तरह सही नहीं होगा।

कांग्रेस ने उन्हें असम जैसे महत्वपूर्ण राज्य का प्रभारी महासचिव बनाया है। यानी पार्टी ने उन्हें संगठन से बाहर नहीं किया, बल्कि जिम्मेदारी का क्षेत्र बदला है।

फिर भी राजनीतिक संदेश जरूर निकलता है। पंजाब में जिस संगठनात्मक संकट को सुलझाने की जिम्मेदारी बघेल को दी गई थी, वह पूरी तरह नहीं सुलझा। इसके बाद हाईकमान ने नया चेहरा चुना है। इसे बघेल के खिलाफ सीधा एक्शन से ज्यादा ‘परफॉर्मेंस रीसेट’ के तौर पर देखा जा सकता है।

छत्तीसगढ़ में भी बदलेगा सियासी समीकरण

भूपेश बघेल के पास अब असम की जिम्मेदारी है, जबकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस संगठन का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है। ऐसे में राज्य की राजनीति में भी उनकी सक्रियता का स्वरूप बदल सकता है।

भूपेश बघेल अभी भी कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हैं, लेकिन संगठनात्मक जिम्मेदारियों में बदलाव यह संकेत देता है कि हाईकमान अब अलग-अलग राज्यों में नए नेतृत्व और नए समीकरण आजमाने के मूड में है।

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