भिलाई। भिलाई नगर निगम में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विशेष बजट सत्र हंगामेदार रहा।
महापौर नीरज पाल द्वारा बजट पेश किए जाने के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच भ्रष्टाचार और नियम विरुद्ध कार्यों को लेकर जमकर बहस हुई। सदन में उस वक्त गहमागहमी बढ़ गई जब भाजपा पार्षदों ने शिक्षा उपकर (Education Cess) की राशि के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया।
शिक्षा उपकर और आर्थिक अपराध का मुद्दा
भाजपा पार्षद पीयूष मिश्रा ने आरोप लगाया कि शिक्षा उपकर की राशि का उपयोग नियमों के विरुद्ध किया गया है, जो सीधे तौर पर आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है।
उन्होंने बजट की पूरी जानकारी सदन में न रखने का भी आरोप लगाया और सभा स्थगित करने की मांग की। इस पर नगर निगम आयुक्त राजीव पांडेय ने स्पष्ट किया कि लगभग 4 करोड़ रुपये की शिक्षा उपकर राशि प्राप्त हुई है और भविष्य में इसे केवल शिक्षा से जुड़े कार्यों पर ही खर्च किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि बीएसपी से भवन अनुज्ञा के रूप में 3 करोड़ रुपये मिले हैं।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच वार-पलटवार
भ्रष्टाचार के आरोपों पर पलटवार करते हुए कांग्रेस पार्षद के. जगदीश ने कहा, “प्रदेश में अब आपकी (भाजपा) सरकार है।
केवल बोलने से कुछ नहीं होगा, अगर भ्रष्टाचार हुआ है तो कार्रवाई करके दिखाएं।” वहीं, नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा पिछले 4 वर्षों के भ्रष्टाचार का लेखा-जोखा लेकर सदन पहुंचे। उन्होंने मीना बाजार मैदान को बेचने जैसे गंभीर मुद्दे उठाए।
सदन की गरिमा और वार्डों की समस्याएं
सत्र के दौरान कांग्रेस पार्षद चंद्रशेखर गवई ने अपनी ही सरकार से अधोसंरचना मद और 201 आवेदनों पर हुए कार्यों का हिसाब मांगा।
दूसरी ओर, ठेकेदारों को हेड बदलकर भुगतान करने के आरोपों ने भी माहौल को गरमाए रखा। पार्षदों ने अपने-अपने वार्डों की मूलभूत समस्याओं जैसे सड़क, नाली और पेयजल के मुद्दों को भी प्राथमिकता से उठाया।
कुल मिलाकर, भिलाई निगम का यह बजट सत्र विकास की चर्चा से ज्यादा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का अखाड़ा बना रहा। शहरवासियों की नजर अब इस पर है कि हंगामे के बीच पारित होने वाला यह बजट उनके जीवन में क्या सुधार लाता है।
