दंतेवाड़ा। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ‘बस्तर पंडुम’ कार्यक्रम के दौरान कहा कि बस्तर अब भय का नहीं, बल्कि भविष्य का प्रतीक बनेगा। उन्होंने चैत्र नवरात्रि की अष्टमी के मौके पर माँ दंतेश्वरी का आशीर्वाद लेकर यह उम्मीद जताई कि अगली चैत्र नवरात्रि से पहले छत्तीसगढ़ में लाल आतंक समाप्त हो जाएगा और बस्तर खुशहाल बनेगा।
अमित शाह ने कहा, “आज बस्तर लाल आतंक से मुक्त होने की कगार पर है और विकास के रास्ते पर चल पड़ा है।” उन्होंने महाराजा प्रवीण रंजन देव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी हत्या कांग्रेस से सहन नहीं हो पाई और वह आदिवासियों की जल, जंगल, जमीन और संस्कृति की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले महान नेता थे।
बस्तर पंडुम को मिलेगा अंतर्राष्ट्रीय दर्जा
शाह ने बताया कि ‘बस्तर पंडुम’ को अब अंतर्राष्ट्रीय दर्जा दिलाने और बस्तर की संस्कृति और कला को पूरी दुनिया तक पहुंचाने का काम मोदी सरकार करेगी। उन्होंने कहा, “अगले साल, ‘बस्तर पंडुम’ में देशभर के आदिवासी क्षेत्रों के कलाकारों को शामिल किया जाएगा। बस्तर की संस्कृति, बोलियां, गान-वाद्य, पेय पदार्थ और भोजन भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं।” उन्होंने बस्तर के विकास को लेकर एक बड़ा ऐलान किया कि जो भी गांव नक्सलियों को सरेंडर कराएगा, उसे 1 करोड़ रुपये की विकास राशि दी जाएगी।
शाह ने कहा कि बस्तर में शांति तभी संभव है, जब बच्चों को स्कूल भेजा जाएगा, माताओं की स्वास्थ्य चिंता की जाएगी, आदिवासी युवाओं को कुपोषण से मुक्ति मिलेगी, और हर गांव में दवाखाना और हर तहसील में अस्पताल हो। इसके साथ ही, हर घर को 7 किलो चावल मुफ्त मिलेगा, और आधार कार्ड, राशन कार्ड तथा स्वास्थ्य बीमा मिलेगा। अमित शाह ने यह भी कहा कि, नक्सलियों से वह अपील करते हैं कि वह हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट आएं, क्योंकि अब विकास का समय है। वर्ष 2024 में 881 नक्सलियों ने सरेंडर किया, और इस वर्ष अब तक 521 नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं। उन्होंने अंत में कहा कि मोदी सरकार अगले पांच वर्षों में बस्तर में ऐसा विकास लाएगी, जो 50 वर्षों में नहीं हुआ। अब बस्तर में गोलियों की आवाज नहीं, बल्कि मशीनों की आवाज सुनाई देगी, और स्कूलों की घंटियां बजेंगी। राजमार्ग बनेंगे, और बच्चे कंप्यूटर के माध्यम से पूरी दुनिया से जुड़ेंगे।