रायपुर। छत्तीसगढ़ का बरनवापारा वन्यजीव अभयारण्य अब विलुप्ति के कगार पर पहुंचे काला हिरण के पुनर्जीवन की मिसाल बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में छत्तीसगढ़ के काले हिरण संरक्षण प्रयासों की सराहना की।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। इससे राज्य की पर्यावरणीय पहल को राष्ट्रीय पहचान मिली है और जमीनी स्तर पर काम कर रहे लोगों का मनोबल बढ़ा है।
करीब 245 वर्ग किलोमीटर में फैला बरनवापारा अभयारण्य आज वन्यजीव संरक्षण की सफलता की कहानी बन चुका है। एक समय ऐसा था जब यहां से काले हिरण लगभग खत्म हो चुके थे। 1970 के दशक के बाद अतिक्रमण और प्राकृतिक आवास नष्ट होने से यह प्रजाति यहां स्थानीय रूप से विलुप्त हो गई थी।
स्थिति में बदलाव अप्रैल 2018 में आया, जब राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में काले हिरण पुनर्स्थापन योजना को मंजूरी मिली। वैज्ञानिक प्रबंधन, नियमित निगरानी और योजनाबद्ध प्रयासों से अब इनकी संख्या बढ़कर लगभग 200 तक पहुंच गई है।
शुरुआती दौर में कई चुनौतियां भी आईं। निमोनिया के कारण करीब 8 काले हिरणों की मौत हुई। इसके बाद प्रबंधन में सुधार किए गए। बाड़ों में रेत की परत बिछाई गई, जल निकासी बेहतर की गई, अपशिष्ट प्रबंधन सुधारा गया और पशु चिकित्सक की नियुक्ति की गई।
आज बरनवापारा के खुले घास के मैदानों में काले हिरणों की सक्रिय मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि किसी प्रजाति को उसके प्राकृतिक परिवेश में दोबारा बसाया जा सकता है। यह छत्तीसगढ़ की वन्यजीव संरक्षण यात्रा का बड़ा उदाहरण बन गया है।
