अविमुक्तेश्वरानंद विवाद: शंकराचार्य की सुरक्षा को लेकर शिष्य ने जताई चिंता, शिविर में 12 CCTV लगाए गए

प्रयागराज। माघ मेले में अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच चल रहे विवाद ने तूल पकड़ लिया है। 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद स्नान के लिए अपनी पालकी में संगम की ओर जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोका और पैदल जाने को कहा। विरोध करने पर शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया और पालकी को संगम से 1 किमी दूर ले जाया गया। इस घटना के बाद शंकराचार्य ने अपने शिविर में धरना शुरू कर दिया।

शंकराचार्य के विशेष प्रतिनिधि देवेंद्र पांडे ने कहा कि प्रशासन और उसके “गुंडे” संत के वेश में घूम रहे हैं और शंकराचार्य की जान को खतरा है। सुरक्षा के मद्देनजर अविमुक्तेश्वरानंद ने शिविर के अंदर और बाहर 12 CCTV कैमरे लगवाए हैं। पांडे ने बताया कि रात में ये लोग वीडियो बनाते हैं और पकड़े जाने पर कहते हैं कि नोटिस देने आए हैं।

अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत भी अभी खराब है। रात में उन्होंने दवा ली थी और शुक्रवार को 5 घंटे आराम के बाद अपनी पालकी पर बैठे। उन्होंने डिप्टी सीएम केशव मौर्य की तारीफ करते हुए कहा कि ऐसे नेता ही मुख्यमंत्री बनने के योग्य हैं जो अफसरों की गलती समझें।

इस बीच, राष्ट्रीय हिंदू दल ने सुझाव दिया कि उन्हें हज यात्रा पर भेजा जाए। गोवर्धन मठ पुरी के शंकराचार्य अधोक्षजानंद ने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद राजनीति कर रहे हैं और उन्हें माफी मांगनी चाहिए या मेला छोड़ देना चाहिए। सांसद संजय सिंह ने कहा कि शंकराचार्य से प्रमाण मांगना दुर्भाग्यपूर्ण है।

राजस्थान के धीरेंद्र शास्त्री और तेज प्रताप यादव ने भी इस घटना की निंदा की। राज्य मानवाधिकार आयोग में शिष्यों के साथ मारपीट की शिकायत दर्ज कराई गई है। मेले में संतों और श्रद्धालुओं के अधिकारों की रक्षा के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की आवश्यकता बताई गई है। माघ मेले में सुरक्षा और धार्मिक परंपरा के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

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