दिल्ली। अनिल धीरुभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) से जुड़े करीब 40 हजार करोड़ रुपए के कथित बैंक फ्रॉड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और CBI को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ कहा कि जांच एजेंसियां अब तक देरी का संतोषजनक कारण नहीं बता पाईं। दोनों एजेंसियों को पहले ही काफी समय मिल चुका है और आगे किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने ED और CBI को चार हफ्ते के भीतर ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी रिकॉर्ड पर लिया कि अनिल अंबानी उसकी पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे। यह आश्वासन अनिल अंबानी की ओर से उनके वकील मुकुल रोहतगी ने दिया।
दरअसल, याचिकाकर्ता और पूर्व IAS अधिकारी ईएएस सरमा ने आशंका जताई थी कि अनिल अंबानी देश छोड़ सकते हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए एजेंसियों से सख्त कार्रवाई और समयबद्ध जांच की बात कही।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि अनिल अंबानी के खिलाफ पहले से लुकआउट सर्कुलर जारी हैं। ED के मुताबिक ADAG से जुड़ी कंपनियों के जरिए करीब 40 हजार करोड़ रुपए की राशि सायफन की गई, जबकि अपराध से अर्जित आय 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है। ED अब तक 8,078 करोड़ रुपए की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच कर चुकी है।
वहीं अनिल अंबानी की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि कारोबारी घाटे और कर्ज में चूक को आपराधिक मामला नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर करीब 20 हजार करोड़ रुपए चुका चुकी हैं।
कोर्ट ने दोहराया कि इतने बड़े आर्थिक अपराध के आरोपों की जांच में देरी गंभीर है और अब जांच एजेंसियों को तेजी से कार्रवाई करनी होगी।
