बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए उनके सरेंडर और जेल जाने पर रोक लगा दी है। साथ ही CBI, राज्य सरकार और सतीश जग्गी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब इस मामले में उम्रकैद की सजा और अपील, दोनों की एक साथ सुनवाई होगी।
अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में दो आदेशों को चुनौती दी थी। पहला, जिसमें CBI को अपील की अनुमति दी गई थी और दूसरा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का वह फैसला, जिसमें उन्हें IPC की धारा 302 और 120-बी के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट ने 6 अप्रैल को फैसला सुनाते हुए जोगी को तीन हफ्ते के भीतर सरेंडर करने के निर्देश दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अमित जोगी को फिलहाल राहत मिल गई है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए न्यायपालिका पर विश्वास जताते हुए अपनी कानूनी टीम का आभार भी व्यक्त किया है।
गौरतलब है कि 4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 आरोपियों को नामजद किया गया था। ट्रायल के दौरान 2007 में रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि अन्य आरोपियों को सजा सुनाई गई थी।
बाद में सतीश जग्गी ने इस फैसले को चुनौती दी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट होते हुए हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को गलत ठहराते हुए अमित जोगी को दोषी माना और उम्रकैद की सजा सुनाई।
अब सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के लिए मामले को संयुक्त रूप से सूचीबद्ध किया है। इस बीच सरेंडर पर रोक से अमित जोगी को बड़ी राहत मिली है। आने वाली सुनवाई इस बहुचर्चित केस की दिशा तय करेगी।
