आवास योजना में फर्जी भुगतान और अधूरे घर के आरोप तथ्यहीन, प्रशासन ने भौतिक सत्यापन के बाद जांच रिपोर्ट सौंपी

रायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को लेकर आज प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन द्वारा जिला स्तरीय जांच दल से विस्तृत भौतिक सत्यापन कराया गया।

जांच रिपोर्ट में सामने आया कि खबर में लगाए गए कई आरोप भ्रामक और अपूर्ण जानकारी पर आधारित हैं। उपायुक्त, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, छत्तीसगढ़ ने स्पष्ट किया है कि अधिकांश मामलों में भुगतान नियमानुसार किया गया है और निर्माण कार्य विभिन्न चरणों में प्रगति पर है।

महासमुंद – 12 हजार से अधिक किश्त अटकी होने का दावा गलत

खबर में बागबाहरा जनपद में 12,366 हितग्राहियों की दूसरी किश्त अटकी होने का दावा किया गया था, जबकि जांच में पाया गया कि योजना के तहत जनपद पंचायत बागबाहरा में कुल 22,910 आवास स्वीकृत हुए हैं। इनमें से 19,411 आवास पूर्ण हो चुके हैं तथा शेष 3,499 निर्माणाधीन हैं। प्रशासन के अनुसार किश्तों का भुगतान निर्माण की प्रगति के अनुरूप किया जा रहा है।

गरियाबंद – अधूरे बताए गए घर निर्माणाधीन पाए गए

ग्राम तुहामेटा में झूलबती के नाम से स्वीकृत आवास में दो किश्तों में एक लाख रुपए जारी किए जा चुके हैं और छत ढलाई पूर्ण पाई गई है। उनके निधन के बाद उत्तराधिकारी के नाम परिवर्तन की प्रक्रिया जारी है। ग्राम पंचायत अडगडी में सुगारो के नाम से स्वीकृत आवास प्लिंथ स्तर पर है और दूसरी किश्त के लिए जियो-टैगिंग पूर्ण की जा चुकी है। इसी तरह ग्राम पंचायत जाड़ापदर में हिरमनी बंजारा के पिता खेतुराम बंजारा के नाम से स्वीकृत आवास चौखट स्तर तक पूर्ण पाया गया। इन मामलों में फर्जी भुगतान के आरोप असत्य पाए गए।

मनरेगा मजदूरी में गड़बड़ी का आरोप भी निराधार

फिंगेश्वर ब्लॉक के लफंदी गांव में मनरेगा मजदूरी में 4 लाख रुपए की कथित गड़बड़ी की जांच में मस्टररोल, मांगपत्र एवं सहमति पत्रों का परीक्षण किया गया, जिसमें किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता नहीं मिली।

सामूहिक गृह प्रवेश पर स्पष्टीकरण

मैनपुर जनपद में सामूहिक गृह प्रवेश को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच में पाया गया कि सभी आवास निर्धारित मानकों के अनुरूप पूर्ण हैं और जियो-टैगिंग व ऑनलाइन मॉनिटरिंग के माध्यम से सत्यापित किए गए हैं।

उपायुक्त ने बताया कि योजना के अंतर्गत भुगतान सीधे लाभार्थियों के खातों में ऑनलाइन माध्यम से किया जाता है और प्रत्येक स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि प्रकाशित समाचार के कई बिंदु अपूर्ण तथ्यों पर आधारित हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बन सकती है। योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को सुरक्षित पक्की छत उपलब्ध कराना है और इसके क्रियान्वयन में पूर्ण पारदर्शिता बरती जा रही है।

Exit mobile version