रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित ताड़मेटला नक्सली हमले मामले में हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। इस फैसले के बाद प्रदेश के डिप्टी सीएम विजय शर्मा का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि मामले में अभी न्यायालय का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं हुआ है और आगे कानूनी विकल्प मौजूद हैं।
डिप्टी सीएम ने कहा कि यह मामला पहले लोअर कोर्ट में चला, जहां दोष सिद्ध नहीं हो पाया। इसके बाद पुलिस और प्रशासन की ओर से हाईकोर्ट में अपील की गई, लेकिन वहां भी आरोप साबित नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि सरकार मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विचार करेगी।
दरअसल, 6 अप्रैल 2010 को सुकमा जिले के ताड़मेटला जंगल में नक्सलियों ने सीआरपीएफ और पुलिस बल पर बड़ा हमला किया था। इस हमले में 76 जवान शहीद हो गए थे। यह देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में से एक माना जाता है। मामले में कई ग्रामीणों को आरोपी बनाया गया था।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने कोर्ट में दलील दी थी कि निचली अदालत ने महत्वपूर्ण सबूतों और आरोपी के इकबालिया बयान को नजरअंदाज किया। वहीं बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य या प्रत्यक्षदर्शी गवाही नहीं है।
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा। कोर्ट ने जांच में कई खामियों का भी उल्लेख किया, जिनमें फोरेंसिक रिपोर्ट का अभाव, गवाहों की पहचान नहीं होना और पर्याप्त तकनीकी साक्ष्य नहीं जुटाना शामिल है।
वहीं अर्बन नक्सलियों पर कार्रवाई को लेकर विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार सतर्कता के साथ काम कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
