दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के साथ अपना गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया है। यह गठबंधन 25 मार्च को हुआ था, जब हुमायूं कबीर ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से मुलाकात की थी। अब AIMIM ने साफ कर दिया है कि वह बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी।
पार्टी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि हुमायूं कबीर के हालिया बयानों से मुसलमानों की निष्ठा और ईमानदारी पर सवाल खड़े होते हैं, जिसे AIMIM किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं कर सकती। पार्टी का कहना है कि वह ऐसे किसी भी विचार या बयान से खुद को अलग रखेगी, जो मुस्लिम समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचाता हो। AIMIM ने यह भी कहा कि बंगाल के मुसलमान लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक रूप से उपेक्षित हैं, और उनके मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच राज्य में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल में मतदान दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होगा। वहीं तमिलनाडु में सभी सीटों पर 23 अप्रैल को एक ही चरण में वोटिंग होगी। चुनाव से पहले विभिन्न दलों के बीच बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AIMIM और AJUP का गठबंधन टूटना चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, कुछ नेताओं का कहना है कि राज्य में मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच ही रहेगा।
