दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल तकनीकी बदलाव नहीं रहा, बल्कि यह दुनिया के कारोबार, नौकरियों और समाज को बुनियादी रूप से बदल रहा है।
बीसीजी और मोलोको की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूज, ट्रैवल और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में AI सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है, क्योंकि ChatGPT जैसे टूल सीधे ग्राहकों और ब्रांड के बीच पहुंच चुके हैं। जो कंपनियां अपना डेटा और कस्टमर रिलेशन मजबूत नहीं करेंगी, वे प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाएंगी।
मूडीज की रिपोर्ट के अनुसार, AI से वैश्विक उत्पादकता में हर साल औसतन 1.5% की बढ़ोतरी होगी। हालांकि, इसका लाभ सभी देशों और वर्गों को समान रूप से नहीं मिलेगा।
अमीर देशों को इसका सबसे ज्यादा फायदा होगा, जबकि विकासशील देशों में इसका असर सीमित रहेगा। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि AI की वजह से महिलाएं, युवा और कम पढ़े-लिखे लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
आंकड़ों के अनुसार, विकसित देशों में 30% नौकरियां बेहतर होंगी, 30% नौकरियों की जगह AI ले सकता है, जबकि 40% पर फिलहाल कम खतरा है।
वहीं, विकासशील देशों में 16% नौकरियां बेहतर होंगी, 24% खत्म हो सकती हैं और 60% पर कम जोखिम रहेगा। अगर हर साल 5% से ज्यादा ऑटोमेशन हुआ तो बेरोजगारी तेजी से बढ़ेगी, जिससे सरकारों पर सामाजिक और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
महिलाएं, युवा और बुजुर्ग कर्मी सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। महिलाएं जिन क्षेत्रों में ज्यादा काम करती हैं, जैसे क्लेरिकल, प्रशासनिक और शिक्षण कार्य, वहां AI तेजी से प्रवेश कर रहा है।
नए ग्रेजुएट्स के लिए एंट्री लेवल जॉब मिलना मुश्किल होगा। वहीं, 55 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मचारियों के लिए नई तकनीक सीखना कठिन होने से दोबारा रोजगार पाना चुनौती बन सकता है।
दूसरी ओर, 30–50 वर्ष की उम्र वाले अनुभवी और कुशल पेशेवरों, उच्च शिक्षित और निवेश से आय कमाने वाले अमीर वर्ग को AI से नए अवसर मिलेंगे।
कुल मिलाकर, AI भविष्य की अर्थव्यवस्था को आकार देगा, लेकिन इसके सामाजिक प्रभावों को संतुलित करना सरकारों और कंपनियों की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
