रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में 14 साल पहले नियुक्त किए गए 67 सब-इंजीनियर (सिविल) की नियुक्तियों को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने साफ कहा कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद योग्यता के नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता और “बैकडोर एंट्री” को किसी भी हालत में मान्यता नहीं दी जाएगी।
कोर्ट ने कहा कि यदि विज्ञापन में शैक्षणिक योग्यता की अंतिम तिथि तय है, तो उसी कट-ऑफ डेट तक डिग्री/डिप्लोमा होना जरूरी है। चयन की तारीख को आधार बनाकर अयोग्य उम्मीदवारों को नियुक्त नहीं किया जा सकता।
दरअसल, वर्ष 2011 में ग्रामीण अभियांत्रिकी सेवा के तहत 275 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी हुआ था, लेकिन नियमों में बदलाव कर 273/275 की जगह 383 नियुक्तियां कर दी गईं।
जांच में 89 ऐसे उम्मीदवार मिले, जिनके पास 23 मार्च 2011 की अंतिम तिथि तक जरूरी योग्यता नहीं थी। इस भर्ती को रवि तिवारी ने चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट ने दो उम्मीदवारों को राहत दी, क्योंकि उन्होंने कट-ऑफ से पहले योग्यता पूरी कर ली थी। बाकी की नियुक्तियां निरस्त कर दी गईं।
हालांकि मानवीय आधार पर कोर्ट ने आदेश दिया कि कर्मचारियों से अब तक दिए गए वेतन-भत्तों की वसूली नहीं होगी। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि लंबी सेवा अवधि अवैध नियुक्ति को वैध नहीं बनाती।
